Home
Council on Energy, Environment and Water Integrated | International | Independent
REPORT
ठाणे सिटी एक्शन प्लान फॉर फ्लड रिस्क मैनेजमेंट 2024
22 June, 2024 | Sustainable Water
कार्तिकेय चतुर्वेदी, आदित्य विक्रम जैन, आयुषी कश्यप

प्रस्तावित उद्धरण: टीएमसी एंड सीईईडब्ल्यू. ठाणे सिटी एक्शन प्लान फॉर फ्लड रिस्क मैनेजमेंट 2024. ठाणेः ठाणे नगर निगम; और नई दिल्ली: काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू).

डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।

अवलोकन

यह रिपोर्ट ठाणे शहर में बाढ़ जोखिम प्रबंधन (flood risk management) के बारे में अपनी तरह की पहली कार्य योजना पेश करती है। यह कार्य योजना शहरी प्रशासकों को शहरी इलाकों में आने वाली बाढ़ के लिए तैयारी करने, उसका शमन करने, और उससे जुड़े जोखिमों को घटाने की एक रूपरेखा उपलब्ध कराती है। यह रिपोर्ट इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए शहर की अनुकूलन क्षमता को मजबूत बनाने में मददगार लागू होने योग्य व व्यापक सुझावों को भी उपलब्ध कराती है, जो ठाणे शहर को फ्लड-रेजिलिएंट स्मार्ट सिटी (flood-resilient smart city) बनाने में मदद करेगी।  

यह कार्ययोजना क्रमबद्ध चरणों में विकसित की गई है। पहला चरण, तीव्रता-अवधि-आवृत्ति वक्र (intensity-duration-frequency (IDF) curve) को बनाने के लिए बारिश के 52 वर्षों के पुराने आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। दूसरा, मानसून की वापसी की विभिन्न अवधियों (रिटर्न पीरियड्स) के दौरान जल बहाव की चरम तीव्रता (पीक फ्लो डिस्चार्ज) का अनुमान लगाया गया। तीसरा, प्रशासनिक वार्ड के स्तर पर शहरी इलाकों में आने वाली बाढ़ से जुड़ा जोखिम सूचकांक विकसित किया गया और सापेक्ष बाढ़ जोखिम (relative flood risk) की सीमा का पता लगाने के लिए गणना की गई। चौथा, अत्यधिक व उच्च जोखिम वाले प्रशासनिक वार्डों के लिए बाढ़ की अधिकता वाले केंद्रों (flood hotspots) को चिन्हित किया गया।  पांचवा चरण, मानसून और गैर-मानसून समय में लागू करने योग्य लघु, मध्यम और दीर्घकालिक सुझावों का एक सेट बनाया गया।

मुख्य बिन्दु

  • पिछले 52 वर्षों में, 24 घंटे की अधिकतम बारिश की मात्रा 72 मिलीमीटर से 267 मिलीमीटर के बीच रही, जो उच्च अस्थायी परिवर्तनशीलता (high temporal variability) का संकेत है; भिन्नता का गुणांक (coefficient of variation) 32 प्रतिशत था।
  • द्विवर्षीय वापसी अवधि (two-year return period ) के लिए अधिकतम चरम बहाव (maximum peak flow discharge) 16.77 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड (क्यूमेक्स) प्रति वर्ग किलोमीटर पाया गया। ठाणे में जल निकासी प्रणाली की मौजूदा वहन क्षमता (carrying capacity) लगभग 16.73 क्यूमेक्स प्रति वर्ग किलोमीटर है। इस प्रकार से यह शहर एक द्विवर्षीय वापसी अवधि के लिए चरम बारिश की घटनाओं को संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है। (एक ऐसी घटना, जिसके किसी एक वर्ष में घटित होने की संभावना 50 प्रतिशत होती है)।
  • पिछले पांच वर्षों के उपग्रह के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर, औसतन एक बार की बारिश में कुल शहरी क्षेत्र का पांच प्रतिशत हिस्सा जलमग्न हो सकता है।
  • यह भी पाया गया कि मजीवाड़ा-मनपाड़ा वार्ड समिति अति-उच्च जोखिम श्रेणी में है। दिवा और नौपाड़ा वार्ड उच्च जोखिम श्रेणी में हैं। इसके बाद कलवा, वागले और उथलसर वार्ड समितियां हैं, जहां पर मध्यम स्तर का जोखिम मौजूद है। लोकमान्य-सावरकर नगर और मुंब्रा ब्लॉक कम जोखिम श्रेणी में आते हैं। वर्तक नगर ब्लॉक में शहरी बाढ़ का जोखिम सबसे कम है।
  • जल-जमाव क्षेत्र के मानचित्र और बाढ़ जोखिम सूचकांक का उपयोग करते हुए, अति-उच्च और उच्च जोखिम वाले वार्डों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हित किया गया, ताकि यहां पर विभिन्न उपायों को प्राथमिकता दी जा सके और संभावित बाढ़ के लिए तैयारियां की जा सकें।
  • लघु, मध्यम और दीर्घ अवधि में लागू करने योग्य सुझावों के युग्म (सेट) में मानसून-पूर्व अवधि में संभावित बाढ़ के लिए तैयारियां करने पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है। मानसून के दौरान और मानसून के बाद की अवधियों में प्रतिक्रिया, राहत, बचाव, पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्यों पर ध्यान देना शामिल है। इसके अलावा, बाढ़ के दौरान और इसके बाद विभिन्न विभागों के कामकाज में तालमेल लाने के लिए एक आपातकालीन संचालन केंद्र (ईओसी) बनाने की आवश्यकता है।

क्या आपके पास कोई प्रश्न हैं?

author image
सीनियर प्रोग्राम लीड
“शहरी केंद्रों में जनसंख्या वृद्धि और आर्थिक केंद्रीकरण में तेजी देखी जा रही है, लेकिन उनके पास पर्याप्त नियोजन का अभाव है और वे शहरी बाढ़ जैसी जलवायु-प्रेरित आपदाओं के लिए लगातार संवेदनशील होते जा रहे हैं। हमारा जोखिम-आधारित अध्ययन, जो तीव्रता अवधि आवृत्ति (IDF) विश्लेषण को प्रशासनिक वार्ड स्तर पर शहरी बाढ़ जोखिम सूचकांक की गणना और हॉटस्पॉट की मैपिंग के साथ जोड़ता है, शहरी बाढ़ को घटाने और इसे क्लाइमेट रेजिलिएंट बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर लागू करने योग्य सुझाव देता है।”

कार्यकारी सारांश

वैश्विक स्तर पर शहरी केंद्र जनसंख्या और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि का एक सामान्य रुझान देख रहे हैं, लेकिन नियोजन के लिहाज से तैयारियां अपर्याप्त हैं। यह अनुमान है कि 2050 तक वैश्विक जनसंख्या का 70 प्रतिशत हिस्सा शहरी क्षेत्रों में निवास करेगा (फर्ग्यूसन एवं अन्य 2023, आईपीसीसी एनडी)। शहरी केंद्रों का अनियोजित विकास तूफान और बाढ़ जैसी जलवायु परिवर्तन-प्रेरित आपदाओं का जोखिम बढ़ा देता है। इससे शहरी आबादी और बुनियादी ढांचे के लिए जोखिम से प्रभावित होने की आशंका (exposure) और सुभेद्यता (vulnerability) बढ़ जाएगी। लगभग 1.54 अरब लोगों या विश्व की 20 प्रतिशत आबादी को प्रत्यक्ष रूप से बाढ़ के जोखिम का सामना करना पड़ता है (रेंटस्क्लर, सलहब और जाफिनो 2022)।

भारत में 5,052 शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) हैं (आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय 2015), जो देश की 31 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। दुनिया के अन्य शहरों और महानगरीय क्षेत्रों की तरह भारत में भी शहरी क्षेत्रों को विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो जलवायु परिवर्तन के कारण जटिल होती जा रही हैं। ऐसी ही एक चुनौती उच्च तीव्रता वाली बारिश की घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति है। बहुत कम समय में होने वाली ये चरम जलवायु घटनाएं सरकारों और समुदायों की वर्तमान अनुकूलन क्षमता को बहुत अधिक प्रभावित करती हैं। सुभेद्य आबादी, विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिक, बच्चे और दिव्यांगजन सर्वाधिक प्रभावित होते हैं। ऐसे सामाजिक प्रभाव शहरी बाढ़ से जुड़े जोखिमों को बढ़ा देते हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण शहरी बाढ़ की घटनाओं की संख्या और तीव्रता में वृद्धि के साथ, शहरों को चाहिए कि वे बाढ़ की घटनाओं को रोकने और बाढ़ नियंत्रण के मौजूदा शहरी बुनियादी ढांचे की रखरखाव व मरम्मत करते हुए सुभेद्य समुदायों को बचाने के लिए कदम उठाएं। शहरी बाढ़ के मामले में एक सक्रिय और समग्र दृष्टिकोण अपनाने के लिए, शहरों को पहले राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी), 2019 के सुझाव के अनुरूप बाढ़ जोखिम आकलन करना चाहिए। इस आकलन में आपदा (hazard), जोखिम से प्रभावित होने की आशंका (exposure) और सुभेद्यता (vulnerability) पर ध्यान देना चाहिए। इसके बाद शमन के लिए प्रभावी व्यवस्था, तैयारियों और प्रतिक्रिया तंत्र को तैयार करना चाहिए, जैसा कि एनडीएमपी (एनडीएमए 2019) और विश्व बैंक की अर्बन फ्लड रिस्क हैंडबुक में बताया गया है (फर्ग्यूसन और अन्य 2023)।

तटीय शहर अचानक आने वाले भीषण तूफान और बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित होते हैं। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र के ठाणे शहर को बार-बार बाढ़ का सामना करना पड़ता है। ठाणे शहर पूर्वी देशांतर 72.50 डिग्री और उत्तरी अक्षांश 19.10 डिग्री के बीच स्थित और लगभग 128 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इसे 9 प्रभाग समितियों (प्रशासनिक वार्ड) और 33 चुनावी वार्ड में बांटा गया है।

सीईईडब्ल्यू और ठाणे शहर के प्रशासन ने शहरस्तरीय बाढ़ कार्य योजना बनाते हुए शहरी बाढ़ से उत्पन्न चुनौतियों के समाधान के लिए साझेदारी की थी। यह रिपोर्ट बारिश के पुराने आंकड़ों का विश्लेषण पेश करती है, जिसे तीव्रता-अवधि-आवृत्ति (आईडीएफ) वक्र बनाने और जल बहाव की चरम तीव्रता का अनुमान लगाने में उपयोग किया गया था। यह रिपोर्ट वार्ड समिति/प्रभाग समिति के स्तर पर हाइड्रोलॉजिकल, प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक कारकों को चिन्हित करती है, जो शहरी बाढ़ से उत्पन्न जोखिमों पर असर डाल सकते हैं; शहरी बाढ़ के हॉट स्पॉट को चिन्हित करती है; बाढ़ की घटनाओं के लिए तैयारी करने और निपटने के बारे में सुझाव देती है (चित्र ईएस1)।

चित्र ईएस1 ठाणे नगर निगम के लिए शहरी बाढ़ जोखिम कार्य योजना के प्रमुख पक्ष

बाढ़ जोखिम प्रबंधन के लिए ठाणे शहर की कार्य योजना (एपीएफआरएम) में तीन विशिष्ट घटक शामिल हैं- क्यों कार्रवाई करने की जरूरत है, कहां पर प्राथमिकता दी जाए और कार्रवाई कौन करेगा।

क्यों कार्रवाई करें: इस खंड में वर्षा के ऐतिहासिक डेटा (1971-2021) का उपयोग करके वर्षा रुझानों का पता लगाना और आईडीएफ वक्र बनाना शामिल है। पिछले 52 वर्षों में, 24 घंटे की अधिकतम बारिश की मात्रा 72 मिलीमीटर से 267 मिलीमीटर के बीच रही, जो उच्च अस्थायी परिवर्तनशीलता (high temporal variability) का संकेत है; भिन्नता का गुणांक (coefficient of variation) 32 प्रतिशत था। बारिश में उतार-चढ़ाव (भिन्नता) का ऐसा उच्च स्तर शहरी प्रशासन के लिए चुनौती पेश करता है, विशेष रूप से अधिक बारिश वाले वर्षों के दौरान, जो शहरी बाढ़ का संभावित कारण बन सकता है। पिछले 52 वर्षों (1970-2021) में, दो वर्षों की वापसी अवधि के लिए जल बहाव की चरम तीव्रता (पीक फ्लो डिस्चार्ज) 16.77 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड (क्यूमेक्स) प्रति वर्ग किमी था और दस वर्ष की वापसी अवधि के लिए, यह 17.13 क्यूमेक्स प्रति वर्ग किमी था (चित्र ईएस2)। हालांकि, ठाणे में जल निकासी प्रणाली की मौजूदा वहन क्षमता सिर्फ 16.73 क्यूमेक्स प्रति वर्ग किमी है, जो दर्शाता है कि यह शहर दस वर्ष की एक वापसी अवधि के साथ बारिश के जलबहाव का प्रबंधन करने के लिए तैयार नहीं है। इसलिए, नए नेटवर्क के निर्माण और मौजूदा बुनियादी ढांचे के रखरखाव दोनों के संदर्भ में मौजूदा तूफानी जल निकासी नेटवर्क को उन्नत बनाने की जरूरत है। ठाणे महानगरपालिका (टीएमसी) ने पहले ही अपनी तूफानी जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने की योजना बना ली है। इसके तहत एकीकृत नाला विकास कार्यक्रम (Integrated Nullah Development Programme - INDP) के तहत 131 किलोमीटर लंबा नया ड्रेनेज नेटवर्क बनाया जाएगा। शहर को यह सुनिश्चित करना होगा कि इसकी क्षमता हर दस साल में होने वाली बारिश को संभालने के लिए पर्याप्त हो।

चित्र ईएस2: विभिन्न परिदृश्यों के लिए ठाणे नगर निगम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के लिए पीक फ्लो डिस्चार्ज अनुमान


स्रोत: आईएमडी के वर्षा आंकड़ों का उपयोग करते हुए लेखकों का विश्लेषण; क्यू (मैक्स) 2002-2006 की उस अवधि को संदर्भित करता है, जब अधिकतम निकासी दर्ज की गई और क्यू (लेटेस्ट) 2017-2021 की अवधि के लिए पीक डिस्चार्ज को संदर्भित करता है।

कहां पर कार्रवाई को प्राथमिकता देनी चाहिएः ठाणे शहर के शहरी बाढ़ जोखिम सूचकांक (चित्र ईएस3) के अनुसार, मजीवाड़ा-मनपाड़ा प्रशासनिक ब्लॉक अति-उच्च जोखिम श्रेणी में आता है, जिसके बाद दिवा और नौपाड़ा ब्लॉक हैं, जो उच्च जोखिम वाली श्रेणी में आते हैं। इसके बाद कलवा, वागले और उथलसर ब्लॉक मध्यम जोखिम श्रेणी में आते हैं। लोकमान्य-सावरकर नगर और मुंब्रा ब्लॉक निम्न जोखिम वाली श्रेणी में आते हैं। वर्तक नगर ब्लॉक अति-निम्न जोखिम श्रेणी में आते हैं। जोखिम विश्लेषण से निर्णयकर्ताओं को विभिन्न कार्रवाइयों की प्राथमिकता निर्धारित करने और संबंधित हितधारकों के साथ-साथ प्रत्येक प्रशासनिक ब्लॉक में आवश्यक कार्रवाइयों के तरीके को चिन्हित करने में मदद मिलेगी।

चित्र ईएस3: विभिन्न प्रभाग समितियों में ठाणे शहर के लिए शहरी बाढ़ जोखिम सूचकांक

कौन (और कैसे) कार्रवाई करेगाः शहरी इलाकों में बाढ़ जोखिम आकलन के निष्कर्षों को मान्यता देने और योजना के प्रभावी समन्वय और कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में हितधारकों की मुख्य भूमिका है। एक्शन प्लान फॉर फ्लड रिस्क मैनेजमेंट (एपीएफआरएम), टीएमसी के लिए लागू करने योग्य सुझावों का एक सेट उपलब्ध कराता है, जो एक बार लागू होने पर प्रशासनिक स्तर पर शहरी इलाकों में बाढ़ जोखिम प्रबंधन और अनुकूलन रणनीतियां बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस योजना में चरणबद्ध दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें मानसून से पहले (दिसंबर-मई), मानसून के दौरान (जून-सितंबर) और मानसून के बाद (अक्टूबर-नवंबर) के चरण शामिल हैं (चित्र ईएस4 देखें)। मानसून से पहले के चरण को तैयारियों की अवधि माना जाता है, जिसके लिए लघु, मध्यम और दीर्घ अवधि के सुझाव दिए गए हैं। मानसून के दौरान और इसके बाद के चरणों के लिए दिए गए सुझावों में हब-स्पोक मॉडल का पालन किया गया है। इस दृष्टिकोण के अनुसार, एक आपातकालीन संचालन केंद्र (ईओसी) टीएमसी के सभी संबंधित विभाग की गतिविधियों में तालमेल लाने का काम करेगा। इस चरण के दौरान प्रत्येक विभाग की जिम्मेदारी को चार प्रमुख हिस्सों- पूर्व चेतावनी, प्रतिक्रिया व राहत, बचाव और पुनर्निर्माण व जीर्णोद्धार- में विभाजित किया गया है।


स्रोत: लेखकों का संकलन

डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

  • क्या भारत बाढ़ के खतरे में है?

    सीईईडब्ल्यू विश्लेषण से पता चलता है कि भारत के 57 प्रतिशत जिले भीषण बाढ़ की घटनाओं और उनके बढ़ते प्रभावों के प्रति सुभेद्य ( vulnerable) हैं। बाढ़, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में, अस्पताल, शिक्षा केंद्र, परिवहन सुविधाएं इत्यादि जैसे प्रमुख सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नाजुक (critical) बना सकती है। इसके अलावा, यह बिजली और पानी सहित बुनियादी और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति बाधित कर सकती है। इसलिए, शहरी क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन के लिए ठोस कार्रवाई करना एक जरूरी लक्ष्य है।

  • भारत में शहरी बाढ़ के मुख्य कारण क्या हैं?

    हाल के वर्षों में, भारतीय शहरों में बाढ़ के रुझान में वृद्धि देखी गई है। इनमें से नवंबर 2021 में चेन्नई, 2022 में बेंगलुरु और अहमदाबाद, जुलाई 2023 में दिल्ली के कुछ हिस्सों और सितंबर 2023 में नागपुर में आई बाढ़ सर्वाधिक उल्लेखनीय हैं। शहरी इलाकों में बाढ़ के बढ़ते जोखिम के प्रमुख कारणों में बारिश के पैटर्न पर जलवायु परिवर्तन के साथ तेज और अनियोजित शहरीकरण का संयुक्त प्रभाव है। एक तरफ, जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश की सघनता से बार-बार और भारी बारिश होती है,जो कई शहरों की जल निकासी व्यवस्था पर भारी दबाव डालती है। दूसरी तरफ, लगातार बढ़ते शहरी क्षेत्रों में अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था तूफान बारिश की घटनाओं के समय निर्मित क्षेत्रों से अतिरिक्त अपवाह के कारण बाढ़ को बहुत विशाल बना देती है।

  • भारत कैसे शहरी बाढ़ का बेहतर प्रबंधन कर सकता है?

    शहरी क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन के लिए तैयार होने और दीर्घकालिक जोखिम को घटाने के लिए स्थानीय स्तर की कार्य योजनाएं बनाना बहुत जरूरी है। ठाणे सिटी एक्शन प्लान फॉर फ्लड रिस्क मैनेजमेंट 2024 के जोखिम आधारित दृष्टिकोण से प्रेरणा लेते हुए और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना में उल्लिखित सिद्धांतों के अनुरूप नगर निगम प्राधिकरणों को अपने-अपने शहरों की आवश्यकता अनुसार बाढ़ नियंत्रण से संबंधित कार्य योजनाएं बनानी चाहिए। ऐसी कार्य योजनाओं में शहर की अनुकूलन क्षमता को मजबूत करने के लिए त्वरित, कार्रवाई योग्य और व्यापक सुझाव दिए जाने चाहिए, जिससे शहरी बाढ़ के प्रभावी प्रबंधन में सहायता मिल सके।

  • क्या ठाणे में शहरी बाढ़ का खतरा है?

    हां, ठाणे शहरी बाढ़ के जोखिम वाला क्षेत्र है। तटीय शहर होने के कारण ठाणे में औसत वार्षिक वर्षा 2932 मिमी है, जिसमें उच्च अंतर-वार्षिक परिवर्तनशीलता (inter-annual variability) होती है। सीईईडब्ल्यू विश्लेषण के अनुसार, के विश्लेषण के अनुसार, 1970 और 2021 के बीच, अधिकतम दैनिक वर्षा 72 मिलीमीटर (मिमी) से 267 मिमी तक रही, जिसके कारण बारिश वाले वर्षों में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं हुईं। यह स्थिति बढ़ते शहरीकरण और अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था (डिजाइन) के कारण और भी खराब हो जाती है, जिससे तूफानी बारिश का सही से प्रबंधन नहीं हो पाता है।

  •  

क्या आपके पास कोई प्रश्न हैं?

author image
सीनियर प्रोग्राम लीड

Sign up for the latest on our pioneering research

Explore Related Publications