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REPORT
एनेबलिंग सर्कुलर इकोनॉमी इन यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट इन इंडिया
ए म्युनिसिपल इंडेक्स फॉर असेसिंग अर्बन लोकल बॉडीज परफॉर्मेंस
साइबा गुप्ता, कार्तिकेय चतुर्वेदी, आयुषी कश्यप और नितिन बस्सी

प्रस्तावित उद्धरण: गुप्ता, साइबा, कार्तिकेय चतुर्वेदी, आयुषी कश्यप और नितिन बस्सी। 2024। एनेबलिंग सर्कुलर इकोनॉमी इन यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट इन इंडिया:ए म्युनिसिपल इंडेक्स फॉर असेसिंग अर्बन लोकल बॉडीज परफॉर्मेंस । नई दिल्ली: काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर

डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।

अवलोकन

यह अध्ययन प्रयुक्त जल प्रबंधन (Used Water management) में भारतीय शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए अपनी तरह के पहला म्युनिसिपल इंडेक्स (Municipal Index) का विकास और आकलन करता है। शहरी घरेलू प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार प्राधिकरण होने के कारण शहरी स्थानीय निकाय इस सूचकांक के केंद्र हैं। ऐसा मूल्यांकन शहरी स्थानीय निकायों को उन क्षेत्रों की जानकारी दे सकता है, जिनमें सुधार करने की जरूरत है और निकायों को भारतीय शहरों में यूज्ड वॉटर ट्रीटमेंट और उसके पुनर्उपयोग को मुख्यधारा में लाने वाली रणनीतियों के निर्माण में सक्षम बना सकता है।

अनुपचारित प्रयुक्त जल (घरेलू सीवेज) जब नदियों और झीलों में छोड़ा जाता है तो वह प्रदूषण को उच्च स्तर पर पहुंचा देता है, जो शहरी इलाकों से गुजरने वाले नदियों के हिस्से में ज्यादा केंद्रित होता है। सुरक्षित उपचार और पुनर्उपयोग होने पर उपयुक्त जल एक अत्यधिक मूल्यवान संसाधन है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) का आकलन बताता है कि 2050 तक भारत में पुनर्उपयोग (Reuse) के लिए प्रतिदिन 96,000 मिलियन लीटर से ज्यादा उपचारित प्रयुक्त जल (Treated Used Water) उपलब्ध होगा।

इस सूचकांक का उद्देश्य स्थानीय निकायों के स्तर पर उपचारित प्रयुक्त जल के पुनर्उपयोग को मुख्यधारा में लाना है। इसके लिए 10 भारतीय राज्यों के श्रेणी-I (1,00,000 से अधिक जनसंख्या) और श्रेणी-II (50,000-99,999 की जनसंख्या) शहरों में से 503 शहरी निकायों को चुना गया, जिन्होंने उपचारित प्रयुक्त जल पुनर्उपयोग नीति अपनाई है। इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। शहरी स्थानीय निकायों को कुल 25 मानकों वाले 5 विषयों (वित्त, बुनियादी ढांचा, दक्षता, आंकड़े व सूचना और प्रशासन) पर आधारित मूल्यांकन ढांचे के जरिए अंक दिए गए। समग्र अंकों के आधार पर, शहरी स्थानीय निकायों को श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया: आकांक्षी, आशाजनक, प्रदर्शन करने योग्य, अग्रणी और उत्कृष्ट, सबसे कम अंक से सबसे अधिक अंक के क्रम में।

प्रमुख बिन्दु

  • मूल्यांकन किए गए 80 प्रतिशत से ज्यादा शहरी स्थानीय निकाय सामूहिक रूप से आशाजनक और प्रदर्शन करने योग्य (औसत से नीचे अंक से लेकर औसत अंक तक) श्रेणी में आए।
  • सूचकांक में सूरत और बेंगलुरु शीर्ष स्थान पर रहे। शहरी स्थानीय निकायों के स्तर पर प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए समर्पित कार्ययोजनाओं का निर्माण इस उल्लेखनीय प्रदर्शन का एक प्रमुख कारण है।
  • प्रशासन और आंकड़े व सूचना दो प्रमुख क्षेत्र हैं, जिनमें स्थानीय निकायों के स्तर पर सुधार लाने की जरूरत है। इन दोनों विषयों में कोई भी शहरी निकाय उत्कृष्ट नहीं पाया गया है।
  • मूल्यांकन किए गए लगभग आधे शहरी स्थानीय निकायों ने बुनियादी ढांचे के तहत पर्याप्त प्रगति की है, उन्होंने प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए जरूरी प्राथमिक बुनियादी ढांचा विकसित कर लिया है। हालांकि, ऊर्जा दक्षता, प्रयुक्त जल को उपचारित करने की क्षमता का उपयोग, और  उपचारित जल की गुणवत्ता जैसे दक्षता मानकों को अभी तक बुनियादी ढांचे के नियोजन के साथ जोड़ा जाना बाकी है।
  • मूल्यांकन किए गएग 90 प्रतिशत शहरी स्थानीय निकायों में प्रयुक्त जल प्रबंधन में वित्तीय नियोजन और निवेश अभी भी प्रारम्भिक अवस्था में है।
  • मूल्यांकन में शामिल 10 राज्यों में से हरियाणा और कर्नाटक शीर्ष के दो स्थानों पर रहे। उन्होंने सभी शहरी स्थानीय निकायों में बुनियादी ढांचे और दक्षता जैसे कुछ विषयों को प्राथमिकता दी है, जिससे सूचकांक में राज्य-व्यापी प्रदर्शन उच्च रहा।
  • पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी राज्य (हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात) इस्तेमाल किए गए पानी के प्रबंधन में आगे हैं, और पूर्वी राज्य (पश्चिम बंगाल और झारखंड) भी अब इसमें आगे बढ़ रहे हैं।

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प्रोग्राम एसोसिएट
“अपनी तरह का पहला म्युनिसिपल यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट इंडेक्स भारत में 500 से अधिक स्थानीय निकायों के लिए आधाररेखा का निर्धारण करता है। इंडेक्स के माध्यम से प्रदर्शन मूल्यांकन शहरी प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए एक सर्कुलर इकोनॉमी दृष्टिकोण को लागू करने की दिशा में एक सूचित निर्णयन और नियोजन में मदद कर सकता है। यह क्रमशः जल गुणवत्ता और सर्कुलर इकोनॉमी से संबंधित सतत विकास लक्ष्य 6 और 12 में योगदान देगा।”

कार्यकारी सारांश

2021 में, भारतीय शहरों ने प्रतिदिन 72,000 मिलियन लीटर से ज्यादा प्रयुक्त जल उत्पन्न किया, जिसमें से केवल 28 प्रतिशत हिस्सा ही उपचारित हो पाया (सीपीसीबी 2021)। शेष प्रयुक्त जल नदी और झीलों जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों में चला गया। यह गैर-मानसूनी महीनों में भारतीय नदियों के सर्वाधिक दूषित होने का एक प्रमुख कारण है। नदियों के शहरी क्षेत्रों, खासकर महानगरों में, से गुजरने वाले हिस्से में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में जल सुरक्षा की एक गंभीर समस्या है, जहां जल की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए स्वच्छ जल के वर्तमान संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। देश में निकलने वाले प्रयुक्त जल की मात्रा को देखते हुए, प्रयुक्त जल का पुनर्उपयोग स्वच्छ जल संसाधनों पर दबाव और जल की मांग-आपूर्ति में अंतर को कम कर सकता है, और शहरी क्षेत्रों में जल पर्यावरण सुधार सकता है। बस्सी, गुप्ता और चतुर्वेदी (2023) का आकलन है कि 2050 तक सीवेज की शोधन क्षमता कुल सीवेज उत्पादन का 80 प्रतिशत हो जाएगी, जिससे भारत में पुनर्उपयोग के लिए प्रतिदिन 96,000 मिलियन लीटर से ज्यादा उपचारित प्रयुक्त जल उपलब्ध रहेगा।

इसलिए, प्रयुक्त जल प्रबंधन को एक आवश्यक शहरी सेवा के रूप में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) को, जो कार्यान्वयन प्राधिकरण होने के साथ भारतीय शहरों में प्रयुक्त जल के लिए बुनियादी ढांचे और सेवा विपणन के विकास व रखरखाव के लिए जिम्मेदार हैं, संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 6.3 के साथ अनुरूपता लाने की जरूरत है: “2030 तक, प्रदूषण को घटाकर, डंपिंग रोककर और खतरनाक रसायनों व सामग्रियों के प्रवहन को न्यूनतम करके, अनुपचारित अपशिष्ट जल की मात्रा को आधा करके व उपचार व पुनर्उपयोग में वैश्विक स्तर पर पर्याप्त वृद्धि करके जल गुणवत्ता में सुधार करना।” इस संदर्भ में, भारत सरकार ने हाल ही में शहरी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए विभिन्न प्रयास किए हैं, ताकि प्रयुक्त जल शोधन को मजबूत किया जा सके और पुनर्उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके, और जल प्रदूषण को दूर करने की दिशा में काम किया जा सके। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण प्रयास नमामि गंगे कार्यक्रम और अटल मिशन फॉर रेजुवेनशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) के अंतर्गत शामिल हैं।

म्यूनिसिपल यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट इंडेक्स का उद्देश्य

उपचारित प्रयुक्त जल के महत्व पर विचार करते हुए, इस शोध अध्ययन का उद्देश्य भारत में स्थानीय निकायों के लिए शहरी प्रयुक्त जल प्रबंधन (एमयूडब्ल्यूएम) इंडेक्स का विकास और गणना करना था, ताकि प्रयुक्त जल प्रबंधन में उनके प्रदर्शन को आंका जा सके। इसके लिए 10 भारतीय राज्यों के श्रेणी-I (1,00,000 से अधिक जनसंख्या) और श्रेणी-II (50,000-99,999 की जनसंख्या) शहरों में से 503 शहरी निकायों को चुना गया, जिन्होंने उपचारित प्रयुक्त जल पुनर्उपयोग नीति को अपनाया है। इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इन प्रगतिशील राज्यों ने जनवरी 2023 में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) द्वारा नेशनल फ्रेमवर्क ऑन सेफ रियूज ऑफ ट्रीटेड वॉटर (एसआरटीडब्ल्यू) के निर्माण से पहले की प्रयुक्त जल पुनर्उपयोग की नीतियों को अपनाया था। अपनी तरह के पहले सूचकांक के रूप में, एमयूडब्ल्यूएम इडेक्स भारत में शहरी प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए सर्कुलर इकोनॉमी के दृष्टिकोण को लागू करने में स्थानीय निकायों की प्रगति को रेखांकित करता है।

निकाय के स्तर पर शहरी प्रयुक्त जल प्रबंधन इंडेक्स का विकास और गणना विधि

प्रयुक्त जल प्रबंधन में चुनिंदा 503 शहरी स्थानीय निकायों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए, एक एमयूडब्ल्यूएम मूल्यांकन रूपरेखा (framework) विकसित की गई थी। यह रूपरेखा थीम-पैरामीटर-इंडीकेटर्स (टीपीआई) दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें 5 विषयों के 25 मापदंड़ों के तहत 27 संकेतक शामिल हैं। विषय और मानकों को चित्र ES1 में दिया गया है।

चित्र ES1 एमयूडब्ल्यूएम मूल्यांकन फ्रेमवर्क

circular economy in wastewater treatment
स्रोत: लेखक का विश्लेषण

25 मापदंडों में से प्रत्येक में एक या अधिक संगत संकेतक हैं, जिनका उपयोग एमयूडब्ल्यूएम इंडेक्स की गणना के लिए किया गया है। मात्रात्मक और गुणात्मक दोनों ही प्रकृति के संकेतक हैं और इन्हें संबंधित पैरामीटर में प्रदर्शन के आधार पर स्थानीय निकायों को अंक देने के लिए उपयोग किया गया है। प्रत्येक शहरी स्थानीय निकायों के लिए समग्र अंक (composite score) की 0-5 के पैमाने पर गणना की गई है। स्थानीय निकायों के लिए समग्र अंक की गणना करने में इस्तेमाल विधि चित्र ES2 में दी गई है।

चित्र ES2 एमयूडब्ल्यूएम सूचकांक समग्र अंक की गणना के लिए विधि


स्रोत: लेखकों का विश्लेषण

मुख्य निष्कर्ष

सूचकांक समग्र अंक के आधार पर, 503 निकायों को पांच पुरस्कार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया, जो प्रयुक्त जल प्रबंधन में उनका प्रदर्शन दर्शाते हैं (चित्र ES3)। आकांक्षी, आशाजनक, प्रदर्शन करने वाला, अग्रणी और उत्कृष्ट श्रेणियां हैं, जिसमें आकांक्षी श्रेणी सबसे कम अंक पाने वाले और उत्कृष्ट श्रेणी सबसे ज्यादा अंक पाने वाले शहरी स्थानीय निकाय का प्रतिनिधित्व करती है। पुरस्कार श्रेणियों के लिए अंक रेंज एमयूडब्ल्यूएम सूचकांक पर शहरी स्थानीय निकायों को प्राप्त न्यूनतम और अधिकतम समग्र अंकों पर आधारित है। इसके अलावा, शहरी स्थानीय निकायों का विषयात्मक मूल्यांकन विषय अंकों पर आधारित है, जिसकी गणना प्रत्येक थीम के अंतर्गत अलग-अलग मापदंडों के मानकीकृत अंकों को जोड़कर की गई है। राज्य प्रदर्शन मूल्यांकन, राज्य के अंकों पर आधारित है, जिसकी गणना राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों के एकीकृत समग्र अंकों के अंकगणित माध्य निकालकर की गई है।

चित्र ES3 MUWM सूचकांक के मुख्य निष्कर्ष


स्रोत: लेखकों का विश्लेषण

(1) एमयूडब्लूएम सूचकांक समग्र अंक के अनुसार यूएलबी प्रदर्शन:

  • समग्र अंक के अनुसार 52 प्रतिशत शहरी स्थानीय निकाय ‘आशाजनक’ श्रेणी में आते हैं मूल्यांकित 503 यूएलबी में से 264 (52 प्रतिशत) आशाजनक श्रेणी में वर्गीकृत किए गए हैं, जो दर्शाता है कि इन स्थानीय निकायों ने प्रयुक्त जल प्रबंधन को एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में स्वीकार किया है और पुनर्उपयोग को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं (चित्र ES3)। हालांकि, उनके प्रयास अभी बिखरे हुए हैं और उन्हें अधिक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। शेष यूएलबी में से 151 (30 प्रतिशत) को प्रदर्शन करने वाला, 47 (9 प्रतिशत) को अग्रणी, 39 (8 प्रतिशत) को आकांक्षी और केवल 2 (1 प्रतिशत से कम) को उत्कृष्ट के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • एमयूडब्ल्यूएम इंडेक्स में सूरत और बेंगलुरु शीर्ष स्थान पर मूल्यांकित 503 शहरी स्थानीय निकायों में से दो, सूरत नगर निगम (एसएमसी) और बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी), को एमयूडब्ल्यूएम इंडेक्स (चित्र ईएस3) में उत्कृष्ट श्रेणी में रखा गया है। हमारे विश्लेषण के अनुसार, यूएलबी स्तर पर प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए एक समर्पित एक्शन प्लान बनाना उनके उल्लेखनीय प्रदर्शन का एक प्रमुख कारण है। उदाहरण के लिए, सूरत ने यूज्ड वॉटर ट्रीटमेंट और उसके रियूज के लिए एक एक्शन प्लान बनाया है, जो शहर के लिए पुनर्उपयोग लक्ष्य का निर्धारण करती है। इसी तरह बेंगलुरु ने शहर में जल प्रबंधन के लिए एक व्यापक विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है, जिसमें सीवेज प्रबंधन के लिए मात्रात्मक और गुणात्मक लक्ष्य शामिल किए गए हैं।

(2) विषयात्मक मूल्यांकन

  • प्रयुक्त जल प्रबंधन में सुधार लाने के लिए ‘प्रशासन’ और ‘आंकड़े व सूचना’ पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है विषयगत अंकों के अनुसार, 392 यूएलबी (78 प्रतिशत) और 246 यूएलबी (49 प्रतिशत) को क्रमशः ‘प्रशासन’ और ‘आंकड़े व सूचना’ के तहत आशाजनक के रूप में वर्गीकृत किया गया है (चित्र ES3)। यह दर्शाता है कि अधिकांश यूएलबी इन विषयों के तहत प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इन पहलों को और मजबूत बनाने की जरूरत है, ताकि जमीन पर ठोस प्रभाव डाला जा सके। कोई भी शहरी स्थानीय निकाय इन दो विषयों के तहत उत्कृष्ट श्रेणी में नहीं पहुंच पाया।
  • लगभग आधे मूल्यांकित शहरी स्थानीय निकायों (ULB) ने 'बुनियादी ढांचे' के तहत महत्वपूर्ण प्रगति की है लगभग 46 प्रतिशत यूएलबी (230) को सामूहिक रूप से बुनियादी ढांचे के विषय के तहत प्रदर्शन करने वाले और अग्रणी के रूप में वर्गीकृत किया गया है (चित्र ES3)। यह सभी पांच विषयों में इन दोनों श्रेणियों के तहत यूएलबी की संख्या अधिकतम है। इस प्रकार से मूल्यांकित यूएलबी के एक महत्वपूर्ण हिस्से ने प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए आवश्यक प्राथमिक बुनियादी ढांचा विकसित कर लिया है।
  • सभी शहरी स्थानीय निकायों में बुनियादी ढांचे का नियोजन करते समय  ‘दक्षता’ के मापदंडों पर विचार करना चाहिए लगभग 60 प्रतिशत यूएलबी (295) को दक्षता विषय के तहत आकांक्षी के रूप में वर्गीकृत किया गया है (चित्र ES3)। यह दर्शाता है कि दक्षता विषय के तहत ऊर्जा दक्षता, प्रयुक्त जल को उपचारित करने की क्षमता के उपयोग और उपचारित प्रयुक्त जल की गुणवत्ता जैसे मापदंडों को अभी भी प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए बुनियादी ढांचे के नियोजन में शामिल किया जाना बाकी है।
  • प्रयुक्त जल के कुशल प्रबंधन के लिए लक्षित वित्तीय आवंटन की आवश्यकता लगभग 90 प्रतिशत यूएलबी (449) को सामूहिक रूप से ‘वित्त’ के तहत आकांक्षी और आशाजनक के रूप में वर्गीकृत किया गया है (चित्र ES3)। यह रुझान बताता है कि प्रयुक्त जल प्रबंधन में वित्तीय नियोजन और निवेश अभी प्रारंभिक अवस्था में है, यहां तक कि उन स्थानीय निकायों में भी, जिन्होंने प्रयुक्त जल शोधन और पुनर्उपयोग के लिए राज्य स्तर पर नीतियों को अपनाया है।

(3) समग्र अंकों के अनुसार राज्यवार प्रदर्शन

  • पश्चिमी व उत्तर-पश्चिमी राज्य और कर्नाटक प्रयुक्त जल प्रबंधन में अग्रणी हैं हरियाणा और कर्नाटक ने क्रमशः 5 में से 1.94 और 1.74 अंकों के साथ शीर्ष के दोनों स्थान प्राप्त किए हैं (चित्र ES4)। इन राज्यों ने प्रयुक्त जल प्रबंधन और पुनर्उपयोग के लिए व्यापक श्रेणीबद्ध कार्ययोजनाएं लागू की हैं। इन्होंने सभी स्थानीय निकायों में बुनियादी ढांचे और दक्षता जैसे कुछ विषयों को प्राथमिकता दी है, जिससे एमयूडब्ल्यूएम इंडेक्स पर राज्य-व्यापी प्रदर्शन उच्च रहा है। पंजाब और राजस्थान क्रमशः 5 में से 1.71 और 1.57 अंकों के साथ तीसरे और चौथे स्थान पर रहे हैं।
  • पूर्वी भारत के राज्य प्रयुक्त जल प्रबंधन की दिशा में तेजी ला रहे हैं 10 राज्यों में से 8 राज्यों में, 85 प्रतिशत शहरी स्थानीय निकाय सामूहिक रूप से आशाजनक (promising) और प्रदर्शन करने वाली (performing) श्रेणियों में आते हैं। उल्लेखनीय रूप से, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के लगभग 90 प्रतिशत निकाय इन श्रेणियों में आते हैं, जो कुछ विषयों में महत्वपूर्ण प्रगति दर्शाता है और इन्हें व्यापक प्रयुक्त जल प्रबंधन पाने के लिए अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है।
  • प्रदर्शन रिपोर्टों के नियमित प्रकाशन से राज्यों में शहरी सेवाओं के प्रदर्शन मूल्यांकन की सटीकता बेहतर हो सकती है छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश सबसे निचले क्रम के तीन राज्य हैं, जिन्हें 5 में से मिले अंक क्रमशः 0.84, 1.01 और 1.07 हैं (चित्र ES4)। इन राज्यों ने आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार संकलित सेवा-स्तर बेंचमार्किंग (एसएलबी) प्रदर्शन रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए उपलब्ध आंकड़ों की कमी ने इन राज्यों में प्रदर्शन मूल्यांकन की सटीकता को प्रभावित किया है, जिसके कारण एमयूडब्ल्यूएम सूचकांक पर राज्यव्यापी प्रदर्शन कम आया है।

चित्र ES4 हरियाणा और कर्नाटक शीर्ष अंक पाने वाले राज्य हैं


स्रोत: लेखक का विश्लेषण

निष्कर्ष और सुझाव

एमयूडब्लूएम इंडेक्स के आधार पर मूल्यांकन किए गए अधिकांश शहरी स्थानीय निकायों ने प्रयुक्त जल प्रबंधन के कुछ पहलुओं में उल्लेखनीय प्रगति की है और अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, उपचारित प्रयुक्त जल का पुनर्उपयोग शहरी प्रयुक्त जल प्रबंधन का एक अनिवार्य घटक है और जिसका अभी भी भारतीय शहरों में मुख्यधारा में आना बाकी है। शहरी प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए सर्कुलर इकोनॉमी दृष्टिकोण को मुख्यधारा में लाने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं।

  • दीर्घकालिक पुनर्उपयोग योजनाओं को अपनाने के लिए शहरी स्थानीय निकायों को सशक्त बनाएं:  अमृत ​​2.0 में शहरी जल कार्य योजनाएं (सीडब्ल्यूएपी) विकसित करने का सुझाव दिया गया है, जिसमें प्रयुक्त जल उपचार और पुनर्उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य शहर में पानी की मांग का 20 प्रतिशत हिस्सा उपचारित प्रयुक्त जल के पुनर्उपयोग से पूरा करना है। मुख्य कार्यान्वयन प्राधिकरणों के रूप में शहरी स्थानीय निकाय को पुनर्उपयोग परियोजनाएं लागू करने के लिए वित्तीय रूप से सतत प्रावधानों के साथ दीर्घकालिक, शहर-स्तरीय पुनर्उपयोग योजनाएं बनाने व अपनाने के लिए सशक्त बनाया जाना चाहिए। ये योजनाएं नेशनल एसआरटीडब्ल्यू फ्रेमवर्क और राज्य-स्तरीय पुनर्उपयोग नीतियों के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होनी चाहिए।
  • एमयूडब्लूएम को मजबूत करने के लिए एक व्यापक डेटाबेस के विकास को सक्षम बनाएं: मौजूदा पुनर्उपयोग नीतियों को अद्यतन करने या पुनर्उपयोग योजनाओं को बनाने के लिए अद्यतन और विश्वसनीय आंकड़ों तक पहुंच आवश्यक है। व्यापक एमयूडब्लूएम मूल्यांकन ढांचा देश भर के शहरी स्थानीय निकायों को प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए एक मूलभूत डेटाबेस बनाने की छूट देता है। साथ ही, एमयूडब्लूएम इंडेक्स के आधार पर प्रदर्शन मूल्यांकन शहरी स्थानीय निकायों को उन क्षेत्रों की जानकारी दे सकता है, जिनमें सुधार करने की जरूरत है और उन्हें अपने अधिकार क्षेत्र में प्रयुक्त जल प्रबंधन को सशक्त बनाने के लिए रणनीतियां बनाने में सक्षम बनाता है। इसलिए, सूचकांक को प्रत्येक वर्ष तैयार किया जा सकता है, जो एक गतिशील डेटा सूची पर आधारित है, जिसे यूएलबी के समर्थन से नियमित रूप से अपडेट किया जाता है। इसलिए, इस सूचकांक को गतिशील आंकड़ों की सूची के आधार पर वार्षिक रूप से विकसित किया जा सकता है, जिसे यूएलबी की मदद से नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।
  • प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए वर्तमान राष्ट्रीय पहलों का लाभ उठाएं: स्थानीय सरकारों को प्रोत्साहन देने के लिए, केंद्र और राज्य सरकारें प्रयुक्त जल प्रबंधन में शहरी स्थानीय निकायों की प्रगति को मानदंड के रूप में उपयोग कर सकती हैं। इसके अलावा यह नदी-केंद्रित शहरी नियोजन को मुख्यधारा में लाने के भारत सरकार के दृष्टिकोण में भी योगदान कर सकता है, जिसमें स्वच्छ पानी की मांग में कमी लाना और प्रभावी प्रयुक्त जल प्रबंधन के माध्यम से प्रदूषण निवारण महत्वपूर्ण घटक हैं।
  • स्थानीय निकायों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाएं: इस मूल्यांकन के लिए चुने गए 503 स्थानीय निकाय उन 10 भारतीय राज्यों में से आते हैं, जिन्होंने उपचारित प्रयुक्त जल की पुनर्उपयोग नीतियों को अपनाया है। इन नीतियों का कार्यान्वयन स्थानीय सरकारों का विशेषाधिकार है। एमयूडब्ल्यूएम इंडेक्स के आधार पर प्रदर्शन का मूल्यांकन करना शहरी स्थानीय निकायों के बीच प्रतिस्पर्धा की स्वस्थ भावना को बढ़ा सकता है, और शहरों में प्रयुक्त जल के उपचार और पुनर्उपयोग को मुख्यधारा में लाने के व्यापक उद्देश्य को हासिल करने में सहायता कर सकता है।

डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।

सवाल-जवाब

Frequently Asked Questions

  • अपशिष्ट जल का उपचार कैसे किया जाता है?

    प्रयुक्त जल (शौचालय, रसोईघर, स्नान/धुलाई से) को पाइप युक्त सीवरेज नेटवर्क के माध्यम से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाया जाता है, जिनका संचालन और रखरखाव स्थानीय सरकारों द्वारा किया जाता है।

  • कहां पर उपचारित अपशिष्ट जल का उपयोग किया जा सकता है?

    ट्रीटमेंट लेवल के आधार पर, विभिन्न गैर-पेय उद्देश्यों, जैसे पार्क और उद्यान, सिंचाई, सड़क की सफाई, वाहन धुलाई, निर्माण, उद्योग और जलाशयों के पुनरुद्धार इत्यादि, के लिए इसका पुनर्उपयोग किया जा सकता है।

  • जल प्रबंधन के लिए शहर के स्तर पर प्राधिकरण क्या हैं?

    शहरी स्थानीय निकाय (जैसे नगर निगम और नगर परिषद), जिन्हें आमतौर पर नगर पालिका के रूप में जाना जाता है, शहरी क्षेत्रों में जल प्रबंधन के लिए जिम्मेदार प्राथमिक प्राधिकरण हैं।

  • शहर स्तर पर प्रयुक्त जल प्रबंधन को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है?

    शहरी स्थानीय निकायों को स्पष्ट रूप से परिभाषित प्राथमिकताओं और लक्ष्यों के साथ दीर्घकालिक प्रयुक्त जल पुनर्उपयोग योजनाएं बनाने और अपनाने का अधिकार देना चाहिए। यह भारतीय शहरों में प्रयुक्त जल के उपचार और पुनर्उपयोग को मुख्यधारा में लाने के लिए एक जरूरी कदम है।

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