
प्रस्तावित उद्धरण: गुप्ता, साइबा, कार्तिकेय चतुर्वेदी, आयुषी कश्यप और नितिन बस्सी। 2024। एनेबलिंग सर्कुलर इकोनॉमी इन यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट इन इंडिया:ए म्युनिसिपल इंडेक्स फॉर असेसिंग अर्बन लोकल बॉडीज परफॉर्मेंस । नई दिल्ली: काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर
डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।
यह अध्ययन प्रयुक्त जल प्रबंधन (Used Water management) में भारतीय शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए अपनी तरह के पहला म्युनिसिपल इंडेक्स (Municipal Index) का विकास और आकलन करता है। शहरी घरेलू प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार प्राधिकरण होने के कारण शहरी स्थानीय निकाय इस सूचकांक के केंद्र हैं। ऐसा मूल्यांकन शहरी स्थानीय निकायों को उन क्षेत्रों की जानकारी दे सकता है, जिनमें सुधार करने की जरूरत है और निकायों को भारतीय शहरों में यूज्ड वॉटर ट्रीटमेंट और उसके पुनर्उपयोग को मुख्यधारा में लाने वाली रणनीतियों के निर्माण में सक्षम बना सकता है।
अनुपचारित प्रयुक्त जल (घरेलू सीवेज) जब नदियों और झीलों में छोड़ा जाता है तो वह प्रदूषण को उच्च स्तर पर पहुंचा देता है, जो शहरी इलाकों से गुजरने वाले नदियों के हिस्से में ज्यादा केंद्रित होता है। सुरक्षित उपचार और पुनर्उपयोग होने पर उपयुक्त जल एक अत्यधिक मूल्यवान संसाधन है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) का आकलन बताता है कि 2050 तक भारत में पुनर्उपयोग (Reuse) के लिए प्रतिदिन 96,000 मिलियन लीटर से ज्यादा उपचारित प्रयुक्त जल (Treated Used Water) उपलब्ध होगा।
इस सूचकांक का उद्देश्य स्थानीय निकायों के स्तर पर उपचारित प्रयुक्त जल के पुनर्उपयोग को मुख्यधारा में लाना है। इसके लिए 10 भारतीय राज्यों के श्रेणी-I (1,00,000 से अधिक जनसंख्या) और श्रेणी-II (50,000-99,999 की जनसंख्या) शहरों में से 503 शहरी निकायों को चुना गया, जिन्होंने उपचारित प्रयुक्त जल पुनर्उपयोग नीति अपनाई है। इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। शहरी स्थानीय निकायों को कुल 25 मानकों वाले 5 विषयों (वित्त, बुनियादी ढांचा, दक्षता, आंकड़े व सूचना और प्रशासन) पर आधारित मूल्यांकन ढांचे के जरिए अंक दिए गए। समग्र अंकों के आधार पर, शहरी स्थानीय निकायों को श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया: आकांक्षी, आशाजनक, प्रदर्शन करने योग्य, अग्रणी और उत्कृष्ट, सबसे कम अंक से सबसे अधिक अंक के क्रम में।
2021 में, भारतीय शहरों ने प्रतिदिन 72,000 मिलियन लीटर से ज्यादा प्रयुक्त जल उत्पन्न किया, जिसमें से केवल 28 प्रतिशत हिस्सा ही उपचारित हो पाया (सीपीसीबी 2021)। शेष प्रयुक्त जल नदी और झीलों जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों में चला गया। यह गैर-मानसूनी महीनों में भारतीय नदियों के सर्वाधिक दूषित होने का एक प्रमुख कारण है। नदियों के शहरी क्षेत्रों, खासकर महानगरों में, से गुजरने वाले हिस्से में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में जल सुरक्षा की एक गंभीर समस्या है, जहां जल की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए स्वच्छ जल के वर्तमान संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। देश में निकलने वाले प्रयुक्त जल की मात्रा को देखते हुए, प्रयुक्त जल का पुनर्उपयोग स्वच्छ जल संसाधनों पर दबाव और जल की मांग-आपूर्ति में अंतर को कम कर सकता है, और शहरी क्षेत्रों में जल पर्यावरण सुधार सकता है। बस्सी, गुप्ता और चतुर्वेदी (2023) का आकलन है कि 2050 तक सीवेज की शोधन क्षमता कुल सीवेज उत्पादन का 80 प्रतिशत हो जाएगी, जिससे भारत में पुनर्उपयोग के लिए प्रतिदिन 96,000 मिलियन लीटर से ज्यादा उपचारित प्रयुक्त जल उपलब्ध रहेगा।
इसलिए, प्रयुक्त जल प्रबंधन को एक आवश्यक शहरी सेवा के रूप में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) को, जो कार्यान्वयन प्राधिकरण होने के साथ भारतीय शहरों में प्रयुक्त जल के लिए बुनियादी ढांचे और सेवा विपणन के विकास व रखरखाव के लिए जिम्मेदार हैं, संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 6.3 के साथ अनुरूपता लाने की जरूरत है: “2030 तक, प्रदूषण को घटाकर, डंपिंग रोककर और खतरनाक रसायनों व सामग्रियों के प्रवहन को न्यूनतम करके, अनुपचारित अपशिष्ट जल की मात्रा को आधा करके व उपचार व पुनर्उपयोग में वैश्विक स्तर पर पर्याप्त वृद्धि करके जल गुणवत्ता में सुधार करना।” इस संदर्भ में, भारत सरकार ने हाल ही में शहरी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए विभिन्न प्रयास किए हैं, ताकि प्रयुक्त जल शोधन को मजबूत किया जा सके और पुनर्उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके, और जल प्रदूषण को दूर करने की दिशा में काम किया जा सके। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण प्रयास नमामि गंगे कार्यक्रम और अटल मिशन फॉर रेजुवेनशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) के अंतर्गत शामिल हैं।
म्यूनिसिपल यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट इंडेक्स का उद्देश्य
उपचारित प्रयुक्त जल के महत्व पर विचार करते हुए, इस शोध अध्ययन का उद्देश्य भारत में स्थानीय निकायों के लिए शहरी प्रयुक्त जल प्रबंधन (एमयूडब्ल्यूएम) इंडेक्स का विकास और गणना करना था, ताकि प्रयुक्त जल प्रबंधन में उनके प्रदर्शन को आंका जा सके। इसके लिए 10 भारतीय राज्यों के श्रेणी-I (1,00,000 से अधिक जनसंख्या) और श्रेणी-II (50,000-99,999 की जनसंख्या) शहरों में से 503 शहरी निकायों को चुना गया, जिन्होंने उपचारित प्रयुक्त जल पुनर्उपयोग नीति को अपनाया है। इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इन प्रगतिशील राज्यों ने जनवरी 2023 में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) द्वारा नेशनल फ्रेमवर्क ऑन सेफ रियूज ऑफ ट्रीटेड वॉटर (एसआरटीडब्ल्यू) के निर्माण से पहले की प्रयुक्त जल पुनर्उपयोग की नीतियों को अपनाया था। अपनी तरह के पहले सूचकांक के रूप में, एमयूडब्ल्यूएम इडेक्स भारत में शहरी प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए सर्कुलर इकोनॉमी के दृष्टिकोण को लागू करने में स्थानीय निकायों की प्रगति को रेखांकित करता है।
निकाय के स्तर पर शहरी प्रयुक्त जल प्रबंधन इंडेक्स का विकास और गणना विधि
प्रयुक्त जल प्रबंधन में चुनिंदा 503 शहरी स्थानीय निकायों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए, एक एमयूडब्ल्यूएम मूल्यांकन रूपरेखा (framework) विकसित की गई थी। यह रूपरेखा थीम-पैरामीटर-इंडीकेटर्स (टीपीआई) दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें 5 विषयों के 25 मापदंड़ों के तहत 27 संकेतक शामिल हैं। विषय और मानकों को चित्र ES1 में दिया गया है।
चित्र ES1 एमयूडब्ल्यूएम मूल्यांकन फ्रेमवर्क

स्रोत: लेखक का विश्लेषण
25 मापदंडों में से प्रत्येक में एक या अधिक संगत संकेतक हैं, जिनका उपयोग एमयूडब्ल्यूएम इंडेक्स की गणना के लिए किया गया है। मात्रात्मक और गुणात्मक दोनों ही प्रकृति के संकेतक हैं और इन्हें संबंधित पैरामीटर में प्रदर्शन के आधार पर स्थानीय निकायों को अंक देने के लिए उपयोग किया गया है। प्रत्येक शहरी स्थानीय निकायों के लिए समग्र अंक (composite score) की 0-5 के पैमाने पर गणना की गई है। स्थानीय निकायों के लिए समग्र अंक की गणना करने में इस्तेमाल विधि चित्र ES2 में दी गई है।
चित्र ES2 एमयूडब्ल्यूएम सूचकांक समग्र अंक की गणना के लिए विधि
स्रोत: लेखकों का विश्लेषण
सूचकांक समग्र अंक के आधार पर, 503 निकायों को पांच पुरस्कार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया, जो प्रयुक्त जल प्रबंधन में उनका प्रदर्शन दर्शाते हैं (चित्र ES3)। आकांक्षी, आशाजनक, प्रदर्शन करने वाला, अग्रणी और उत्कृष्ट श्रेणियां हैं, जिसमें आकांक्षी श्रेणी सबसे कम अंक पाने वाले और उत्कृष्ट श्रेणी सबसे ज्यादा अंक पाने वाले शहरी स्थानीय निकाय का प्रतिनिधित्व करती है। पुरस्कार श्रेणियों के लिए अंक रेंज एमयूडब्ल्यूएम सूचकांक पर शहरी स्थानीय निकायों को प्राप्त न्यूनतम और अधिकतम समग्र अंकों पर आधारित है। इसके अलावा, शहरी स्थानीय निकायों का विषयात्मक मूल्यांकन विषय अंकों पर आधारित है, जिसकी गणना प्रत्येक थीम के अंतर्गत अलग-अलग मापदंडों के मानकीकृत अंकों को जोड़कर की गई है। राज्य प्रदर्शन मूल्यांकन, राज्य के अंकों पर आधारित है, जिसकी गणना राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों के एकीकृत समग्र अंकों के अंकगणित माध्य निकालकर की गई है।
चित्र ES3 MUWM सूचकांक के मुख्य निष्कर्ष

स्रोत: लेखकों का विश्लेषण
(1) एमयूडब्लूएम सूचकांक समग्र अंक के अनुसार यूएलबी प्रदर्शन:
(2) विषयात्मक मूल्यांकन
(3) समग्र अंकों के अनुसार राज्यवार प्रदर्शन
चित्र ES4 हरियाणा और कर्नाटक शीर्ष अंक पाने वाले राज्य हैं

स्रोत: लेखक का विश्लेषण
एमयूडब्लूएम इंडेक्स के आधार पर मूल्यांकन किए गए अधिकांश शहरी स्थानीय निकायों ने प्रयुक्त जल प्रबंधन के कुछ पहलुओं में उल्लेखनीय प्रगति की है और अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, उपचारित प्रयुक्त जल का पुनर्उपयोग शहरी प्रयुक्त जल प्रबंधन का एक अनिवार्य घटक है और जिसका अभी भी भारतीय शहरों में मुख्यधारा में आना बाकी है। शहरी प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए सर्कुलर इकोनॉमी दृष्टिकोण को मुख्यधारा में लाने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं।
डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।
प्रयुक्त जल (शौचालय, रसोईघर, स्नान/धुलाई से) को पाइप युक्त सीवरेज नेटवर्क के माध्यम से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाया जाता है, जिनका संचालन और रखरखाव स्थानीय सरकारों द्वारा किया जाता है।
ट्रीटमेंट लेवल के आधार पर, विभिन्न गैर-पेय उद्देश्यों, जैसे पार्क और उद्यान, सिंचाई, सड़क की सफाई, वाहन धुलाई, निर्माण, उद्योग और जलाशयों के पुनरुद्धार इत्यादि, के लिए इसका पुनर्उपयोग किया जा सकता है।
शहरी स्थानीय निकाय (जैसे नगर निगम और नगर परिषद), जिन्हें आमतौर पर नगर पालिका के रूप में जाना जाता है, शहरी क्षेत्रों में जल प्रबंधन के लिए जिम्मेदार प्राथमिक प्राधिकरण हैं।
शहरी स्थानीय निकायों को स्पष्ट रूप से परिभाषित प्राथमिकताओं और लक्ष्यों के साथ दीर्घकालिक प्रयुक्त जल पुनर्उपयोग योजनाएं बनाने और अपनाने का अधिकार देना चाहिए। यह भारतीय शहरों में प्रयुक्त जल के उपचार और पुनर्उपयोग को मुख्यधारा में लाने के लिए एक जरूरी कदम है।
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