
प्रस्तावित उद्धरण: टीएमसी और सीईईडब्ल्यू. 2024. हीट एक्शन प्लान फॉर ठाणे सिटी 2024. ठाणे: ठाणे म्युनिसिपल कार्पोरेशन, ठाणे; एंड काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू)।
डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।
भारत के लिए मौजूदा रुझान और भविष्य के जलवायु पूर्वानुमान हीटवेव की तीव्रता, आवृत्ति और अवधि में बढ़ोतरी होने का संकेत देते हैं। नमी और अर्बन हीट आइलैंड जैसे कारकों की वजह से ठाणे जैसे तटीय शहरों को अतिरिक्त जोखिम का सामना करना पड़ता है। इन कारकों की परस्पर क्रिया महसूस होने वाले तापमान (felt temperatures) को 3-4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा सकती है।
ठाणे शहर में गर्मी की समस्या से निपटने और जोखिम के लिए तैयारी रखने के लिए, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) और ठाणे नगर निगम ने साझीदारी में पूर्व-सक्रियता के साथ शहर का पहला हीट एक्शन प्लान बनाया है।
प्रचंड गर्मी के दौरान मृत्यु दर को शून्य करने, गर्मी से जुड़ी बीमारियों व समस्याओं का दबाव घटाने और आर्थिक प्रभावों को कम करने के लिए समर्पित ठाणे हीट एक्शन प्लान ने गर्मी से निपटने की रणनीतियों के लिए ‘कब, कहां, कौन और कैसे’ (3डब्ल्यूएच) फ्रेमवर्क को अपनाया है, जो कि 2019 एनडीएमए नेशनल गाइडलाइंस फॉर प्रीप्रेशन ऑफ एक्शन प्लान: प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट ऑफ हीट वेव (एनडीएमए 2019) के अनुरूप है। यह ऐतिहासिक पैटर्न और भविष्य के अनुमानों पर विचार करते हुए गर्मी के खतरों का सूक्ष्मता के साथ मूल्यांकन करता है, जिसमें महसूस की जाने वाली गर्मी (तापमान + आर्द्रता), अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव, गर्म रातों की संख्या और वार्ड (प्रभाग समिति) स्तर के सामाजिक-आर्थिक कारक शामिल होते हैं।
2023 में, वैश्विक तापमान ने रिकॉर्ड बनाया था, जो इसे अब तक का सबसे गर्म वर्ष के रूप में दर्ज करता है। इस तरह की तेज ग्लोबल वॉर्मिंग अगले पांच वर्षों में 1.5 डिग्री सेल्सियस की अति-महत्वपूर्ण सीमा को पार कर जाएगी (विश्व मौसम विज्ञान संगठन 2023)। भारत जैसे सुभेद्य और विकासशील देशों में पहले से इस बढ़ी हुई गर्मी के दुष्परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। फरवरी 2023 में, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने जानकारी दी कि यह 1901 के बाद की सबसे गर्म फरवरी है। इसके बाद, मई 2023 में, 10 भारतीय राज्यों को 2-3 सप्ताह तक चली लंबी लू (हीटवेव) का सामना करना पड़ा (आईएमडी 2023)। इसके अलावा, 2024 के ग्रीष्मकालीन पूर्वानुमान में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भारत के अधिकांश हिस्सों में उच्चतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का पूर्वानुमान व्यक्त किया था, जो लू चलने की समयावधि को बढ़ाता है (आईएमडी 2024)।
भारत के लिए जलवायु अनुमानों से पता चलता है कि प्रचंड गर्मी और अधिक बढ़ेगी, इसकी आवृत्ति बढ़ेगी, यह लंबे समय तक चलेगी, और यह वैसे बड़े भौगोलिक क्षेत्रों को भी प्रभावित करेगी, जो पहले इससे नहीं प्रभावित थे। आर्द्रता और अर्बन हीट आइलैंड, विशेष रूप से शहरों में, जैसे अन्य कारक गर्मी की इन चरम स्थितियों को और अधिक विकराल और जटिल बनाएंगे। पहले से ही पूरे देश में रिकॉर्ड-तोड़ने वाली गर्मी देखी जा रही है, इसलिए विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में तत्काल हीटवेव के जोखिम के शमन और अनुकूलन के लिए रणनीतियां बनाने और लागू करने की जरूरत है।
वर्तमान में, भारत में 4,800 से अधिक शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) हैं, जो देश की लगभग 35 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय 2023)। शहरी क्षेत्रों को धीमी गति से शुरू होने वाली घटनाओं जैसे कि हीटवेव और तेजी से शुरू होने वाली घटनाओं, जैसे कि भारी बारिश के कारण शहरी बाढ़, से जुड़ी बहुआयामी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। शहरों में बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, रोगों और गंभीर बीमारियों का सामना करने वालों की एक बड़ी आबादी रहती है, जो कि गर्मी के प्रति सुभेद्य है। यह गर्मी की समस्या से जुड़े जोखिम को बढ़ा देता है। इस स्थिति को देखते हुए, भारत के शहरों को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के 2019 के दिशानिर्देशों में दिए गए सुझाव के अनुसार, व्यापक हीट एक्शन प्लान बनाने चाहिए। इन योजनाओं में स्थानीय स्तर पर गर्मी के खतरे का पता लगाने के साथ-साथ गर्मी से बचाव, तैयारी और प्रतिक्रिया के प्रभावी तरीके विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
भारत में तटीय शहरों को आर्द्रता (नमी) के कारण संयुक्त जोखिमों के रूप में एक अतिरिक्त चुनौती से जूझना पड़ता है, जो शुष्क तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर और सापेक्षिक आर्द्रता 60 प्रतिशत से अधिक होने पर गर्मी में 3-4 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि कर सकती है। परिणामस्वरूप, ठाणे जैसे तटीय शहरों के लिए हीट एक्शन प्लान में सापेक्षिक आर्द्रता के संयुक्त प्रभावों को ध्यान में रखना चाहिए। इसके अलावा, स्वास्थ्य पर गर्म रातों के प्रभावों पर भी ध्यान देने की जरूरत है, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है, जो हीट स्ट्रोक और अन्य संबंधित बीमारियों में प्रमुख भूमिका निभाता है, क्योंकि रात के समय ज्यादा गर्मी होने से व्यक्ति को दिन के समय की गर्मी से कोई राहत नहीं मिल पाती है।
ठाणे शहर प्रशासन ने शहर-स्तरीय हीट एक्शन प्लान बनाकर इन चुनौतियों का समाधान करने का प्रयास किया है, जो वार्ड के स्तर पर ऐतिहासिक रुझानों और शुष्क तापमान की चरम स्थितियों, आर्द्रता, गर्म रातों और सामाजिक-आर्थिक कारकों के अनुमानों का आकलन करते हुए गर्मी से जुड़े जोखिमों की जानकारी देता है (चित्र ES1)। इसका प्राथमिक उद्देश्य मानव स्वास्थ्य पर गर्मी की समस्या के प्रभाव को घटाना और इससे निपटने की तैयारी व प्रतिक्रिया प्रणाली के लिए प्रभावी विकल्प तैयार करना था।
चित्र ES1 ठाणे शहर के हीट एक्शन प्लान की विशेषताएं

स्रोत: लेखकों का संकलन
महाराष्ट्र का हीट एक्शन प्लान पहले से ही पूर्वी महाराष्ट्र को एक प्रमुख हीटवेव हॉटस्पॉट चिन्हित करता है। ठाणे शहर समुद्र किनारे बसा है और तापमान व आर्द्रता दोनों के कारण इसे अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भले ही अभी ठाणे शहर को हीटवेव हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित नहीं किया गया है, लेकिन जलवायु संबंधी अनुमान 1982-2024 की समयावधि की तुलना में 2024 से 2040 तक की अवधि में अत्यधिक गर्म दिनों की आवृत्ति में तीन गुना वृद्धि के संकेत देते हैं। परिणामस्वरूप, इसी समयावधि में गर्म रातों (warm nights) की आवृत्ति लगभग चार गुना बढ़ने का अनुमान है। इसलिए, यह योजना दीर्घकालिक गर्मी के शमन को प्राथमिकता देती है और हीटवेव के लिए तैयारी और प्रतिक्रिया की संस्कृति को विकसित करने का लक्ष्य रखती है।
प्रचंड गर्मी के दौरान मृत्यु दर को शून्य करने, गर्मी से जुड़ी बीमारियों व समस्याओं का दबाव घटाने और आर्थिक प्रभावों को कम करने के लिए समर्पित ठाणे हीट एक्शन प्लान ने गर्मी से निपटने की रणनीतियों के लिए ‘कब, कहां, कौन और कैसे’ (3डब्ल्यूएच) फ्रेमवर्क को अपनाया है, जो कि 2019 एनडीएमए नेशनल गाइडलाइंस फॉर प्रीप्रेशन ऑफ एक्शन प्लान: प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट ऑफ हीट वेव (एनडीएमए 2019) के अनुरूप है।
कब कदम उठाएं: इस चरण में जैव-मौसम विज्ञान संकेतकों, विशेष रूप से हीट इंडेक्स, का विश्लेषण करते हुए ठाणे के लिए शहर-विशिष्ट तापमान सीमा (city-specific heat thresholds) का निर्धारण शामिल है। दीर्घकालिक (1982-2022) प्रतिशत अंक दृष्टिकोण का इस्तेमाल करते हुए, ये सीमाएं (thresholds) देखी गई चरम स्थितियों के आधार पर महसूस होने वाली गर्मी का आकलन करती है। भले ही भारतीय मौसम विभाग हीटवेव के पूर्वानुमानों और घोषणाओं के लिए शुष्क अधिकतम तापमान के आधार पर सभी तटीय क्षेत्रों के लिए सामान्य क्षेत्रीय मानदंड प्रदान करता है, लेकिन ठाणे के लिए अधिकतम तापमान और सापेक्ष आर्द्रता जैसे जलवायु चरों को ध्यान में रखकर स्थानीय सीमा (local thresholds) की गणना की गई। हीट अर्ली वार्निंग की दक्षता को बढ़ाने के क्रम में परिस्थिति-अनुकूलन स्तरों (acclimatisation levels) पर विचार करते हुए, तटीय क्षेत्र में गर्मी की समस्याओं का दबाव दूर करने के लिए यह बहुत जरूरी है। इसके अलावा, इसी तरह से शुष्क तापमान (dry temperature) पर आधारित सीमाओं को तैयार किया गया है। यह एक्सन प्लान संबंधित विभागों और जनसंख्या को अलर्ट जारी करने और शुरुआती चेतावनी भेजने के तंत्र की रूपरेखा भी उपलब्ध कराता है।
(चित्र ES2) हीट इंडेक्स के आधार पर कलर कोडेड अलर्ट के लिए महसूस होने वाले तापमान की सीमा, जो शुष्क तापमान के अतिरिक्त आर्द्रता का भी प्रभाव दर्शाती है
स्रोत: लेखक का विश्लेषण
कहां पर कदम उठाएं: इंटरगर्वेमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेंट चेंज (आईपीसीसी) की 2014 की 5वीं मूल्यांकन रिपोर्ट (एआर) के अनुसार रिस्क असेसमेंट फ्रेमवर्क का पालन करते हुए, ठाणे हीट एक्शन प्लान निर्धारित गर्मी के जोखिम के आधार पर ठाणे शहर के सभी 9 वार्डों की रैंकिंग उपलब्ध कराता है। आईएमडीएए रिएनालिसिस क्लाइमेट डेटा (1982-2022) और सैटेलाइट से प्राप्त भू-सतह तापमान का उपयोग करके आपदा संकेतकों (Hazard indicators) को निर्धारित किया गया, जबकि जोखिम की संभावना और सुभेद्यता का पता लगाने में उपग्रह-आधारित संकेतकों और ठाणे नगर निगम के विभिन्न विभागों द्वारा एकत्रित सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों का उपयोग किया गया।
तापमान और सापेक्षिक आर्द्रता (जिसे महसूस होने वाला तापमान कहा जाता है) को मिलाकर किया गया हीट इंडेक्स विश्लेषण बताता है कि पिछले 40 वर्षों (1982-2022) में ठाणे के गर्मी के महीनों में महसूस होने वाले और शुष्क दोनों ही अधिकतम तापमानों में पर्याप्त वृद्धि हुई है। महसूस होने वाले और शुष्क तापमान के बीच औसत अंतर, जो नमी से संबंधित तापमान वृद्धि को दर्शाता है, में हालिया वर्षों में थोड़ी वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए, 2022 में, गर्मियों में महसूस हुआ अधिकतम तापमान शुष्क तापमान से लगभग 3 डिग्री सेल्सियस अधिक था, जो आर्द्रता के अतिरिक्त कारक की वजह से तापमान के अधिक दबाव के प्रभाव को दिखाता है (चित्र ES3)।
चित्र ES3 पिछले 40 वर्षों में ठाणे शहर में शुष्क तापमान और महसूस किए गए तापमान (शुष्क तापमान + सापेक्ष आर्द्रता) के बीच का अंतर 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है
स्रोत: लेखकों का संकलन
चित्र ES4 में दिखाए गए ठाणे शहर के हीट रिस्क इंडेक्स के अनुसार, वागले और मुंब्रा वार्ड सबसे ज्यादा जोखिम में हैं, इसके बाद कलवा और लोकमान्य सावरकर नगर वार्ड हैं, जो मध्यम जोखिम वाली श्रेणी में आते हैं। फिर दिवा, नौपाड़ा और उथलसर वार्ड हैं, जहां पर कम जोखिम नजर आता है, जबकि वर्तक नगर और माजीवाड़ा-मनपाड़ा बहुत कम जोखिम वाले वार्ड हैं।
कौन और कैसे कदम उठाएगा: रिस्पॉन्सिबिलिटी मैट्रिक्स (responsibilities matrix), जिसमें जोखिम घटाने, तैयारी करने और प्रतिक्रिया से संबंधित रणनीतियां बताई गई हैं, संबंधित विभागों की भूमिकाओं, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और अन्य हितधारकों की सहायक भूमिका की स्पष्ट जानकारी देती है, ताकि योजना के क्रियान्वयन समय प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जा सके (इसे HAP के अध्याय 6 और 7 देखें)। ठाणे नगर निगम ने एक हीट वेव टास्क फोर्स कमेटी (अनुलग्नक 4 का संदर्भ लें) भी बनाई है, जो हीट एक्शन प्लान के कार्यान्वयन की निगरानी करेगी और गर्मी के मौसम के बाद उसकी समीक्षा करेगी। इस प्लान से मिलने वाली सीख को दर्ज करने से भविष्य में योजना निर्माण और कार्यान्वयन बेहतर बनेगा। एक निगरानी और मूल्यांकन ढांचा (monitoring and evaluation framework) (अध्याय 10 देखें) हीट एक्शन प्लान की प्रत्येक कार्रवाई में होने वाली प्रगति की निगरानी करने के साथ-साथ उसे दर्ज भी करता है। प्रत्येक विभागों द्वारा अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक कार्यों के लिए वित्तीय तंत्र की भी पहचान की गई है।
इस एक्शन प्लान में स्वास्थ्य संबंधी मौतों और बीमारियों को रिकॉर्ड करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के प्रारूप को भी शामिल किया गया है। जनसंपर्क और जागरूकता को बढ़ाने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) रणनीतियों को भी चिन्हित किया गया है।
चित्र ES4 2024 तक, ठाणे शहर के अलग-अलग प्रभाग समितियों के लिए हीट रिस्क इंडेक्स

स्रोत: लेखक का विश्लेषण
डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।
भारत में जलवायु परिवर्तनशीलता और मानव-जनित कारकों के संयुक्त प्रभावों से तापमान बढ़ रहा है। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, वनों की कटाई और औद्योगिक गतिविधियां ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनती हैं, जिससे तापमान में वृद्धि होती है। भारत में तीव्र शहरीकरण भी हो रहा है, जिसका मतलब है कि यहां भूमि उपयोग में व्यापक बदलाव हो रहे हैं। यह, नमी के साथ मिलकर, अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव को बढ़ाता है, जिससे घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में तापमान और भी अधिक हो जाता है।
फरवरी 2023 में, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 1901 के बाद की सबसे गर्म फरवरी का महीना बताया। इसके बाद मई 2023 में 10 भारतीय राज्यों को 2-3 सप्ताह तक चलने वाली लंबी हीटवेव का सामना करना पड़ा। ऐसी चरम स्थितियों से गर्मी से होने वाली मौतें, काम करने की मुश्किल परिस्थितियां और वेक्टर जनित रोगों का व्यापक प्रसार होता है, खासकर झुग्गियों में रहने वाली सुभेद्य आबादी पर। इसका असर कृषि जैसे अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर भी आता है। उदाहरण के लिए, 2022 की हीटवेव, जो सबसे लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव में से एक है, से सिंधु-गंगा के मैदानी राज्यों में गेहूं उत्पादन में 15-25 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
जलवायु अनुमान बताते हैं कि भारत में गर्मी की चरम स्थितियां और अधिक सघन होंगी, इनकी दर और समयावधि में बढ़ोतरी होने के साथ ज्यादा बड़े इलाकों को प्रभावित करेंगी। लेकिन एक रणनीति और प्रभावपूर्ण योजना बनाकर हीटवेव को आपदा बनने से रोका जा सकता है। इसलिए, हमें हीटवेव के असर को घटाने के लिए जोखिम पर आधारित और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप गर्मी से बचाव और अनुकूलन की रणनीतियां बनानी होंगी, जिन्हें हीट एक्शन प्लान कहा जाता है।
ठाणे शहर के प्रशासन ने एक शहर-स्तरीय हीट एक्शन प्लान बनाकर तटीय शहर में गर्मी के तनाव को कम करने का प्रयास किया है। यह प्लान विस्तृत वार्ड/प्रभाग समितियों के स्तर पर ऐतिहासिक रुझानों और शुष्क तापमान की चरम सीमाओं, आर्द्रता, गर्म रातों और सामाजिक-आर्थिक कारकों के अनुमानों को ध्यान में रखकर गर्मी के खतरों को समझने में मदद करता है। इसका प्राथमिक उद्देश्य मानव स्वास्थ्य पर गर्मी की समस्या के के प्रभावों को करने का साथ तैयारी और प्रतिक्रिया तंत्र के लिए प्रभावी विकल्प उपलब्ध कराना है।
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