
प्रस्तावित उद्धरण: खंडूजा, एकांशा, कार्तिकेय चतुर्वेदी, आदित्य विक्रम जैन और नितिन बस्सी. 2023. इंडियाज पार्टिसिपेटरी ग्राउंड वॉटर मैनेजमेंट प्रोग्राम: लर्निंग फ्रॉम द अटल भूजल योजना इंप्लीमेंटेशन इन राजस्थान। नई दिल्ली: काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायरमेंट एंड वॉटर
डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।
यह अध्ययन, भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के साथ साझेदारी में, केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना, अटल भूजल योजना का राजस्थान के लिए मूल्यांकन करता है, जो उन सात भारतीय राज्यों में से एक है, जहां पर यह योजना लागू की जा रही है। 2019 में शुरू हुई अटल भूजल योजना का उद्देश्य भूजल प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी और अंतर-मंत्रालयी सामंजस्य (inter-ministerial convergence) को मुख्यधारा में लाना है।
भारत अपनी पेयजल और कृषि उत्पादन की जरूरतों के लिए मुख्य रूप से भूजल पर निर्भर है, जिसके कारण यह पूरे विश्व में सबसे बड़ा भूजल दोहनकर्ता बन गया है। हालांकि, सततशीलता (sustainability) जोखिम में है। भूजल की अदृश्य और गतिशील प्रकृति, नृशास्त्रीय और प्राकृतिक खतरों के साथ मिलकर, इस संसाधन के प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी की जरूरत को अति-महत्वपूर्ण बना दिया है।
डेस्क रिव्यू और राजस्थान में योजना के कार्यान्वयन में शामिल 16 जिलों में से 8 जिलों में फील्डवर्क के आधार पर, अध्ययन ने भूजल विभाग, लाइन विभागों और सिविल सोसाइटी और लाभार्थियों के भीतर राज्य, जिला और पंचायत स्तर पर कार्यान्वयन करने वालों को दृष्टिकोण को शामिल किया है। इसका उद्देश्य योजना और इसके विभिन्न घटकों और योजना को लागू करने/पहुंच में सक्षम और बाधा डालने वाले कारकों के बारे में विभिन्न उत्तरदाताओं के ज्ञान में जानकारियां एकत्र करना है। फिर इन जानकारियों को योजना की ताकत, कमजोरी, अवसर और खतरे का विश्लेषण करने के लिए आत्मसात किया जाता है; और मजबूत कार्यान्वयन के लिए सिफारिशें की जाती हैं। इसका उद्देश्य योजना और इसके विभिन्न घटकों के बारे में विभिन्न उत्तरदाताओं के ज्ञान के साथ-साथ योजना के कार्यान्वयन/पहुंच को सक्षम बनाने और बाधा डालने वाले कारकों की जानकारी एकत्रित करना है। इसके बाद इन जानकारियों को योजना की शक्ति, कमी, अवसर और चुनौती विश्लेषण (strength, weakness, opportunity, and threat analysis) के लिए मिलाया गया है; और इसके आधार पर कार्यान्वयन को सशक्त बनाने के लिए सुझाव दिए गए हैं।
भूजल सरलता से सुलभ मीठे पानी का लगभग 99 प्रतिशत हिस्से का स्रोत है (संयुक्त राष्ट्र 2022)। यह अमूल्य संसाधन पूरे विश्व, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक और सिंचाई क्षेत्रों के अरबों हितधारकों की पानी की मांग को पूरा करने में अति-महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चूंकि अधिक सरलता से सुलभ होने के कारण सतही जल (surface water) संसाधनों का अत्यधिक दोहन हो रहा है और जलवायु परिवर्तन के कारण उनकी उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, इसलिए भूजल पर निर्भरता काफी बढ़ गई है।
भारत में, भूजल ने देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने, पर्यावरण को संरक्षित करने और जीवन स्तर को बेहतर बनाए रखने में एक प्रमुख भूमिका निभाई है। हालांकि, पिछले कुछ दशकों के दौरान भूजल दोहन में वृद्धि देखी गई है, कुछ क्षेत्रों में वार्षिक भूजल रिचार्ज की दर से कहीं अधिक भूजल दोहन हुआ है। इसके अलावा, भूजल दोहन यह तेज बढ़ोतरी काफी हद तक अनियोजित और अप्रबंधित रही है। हालांकि, पहले भूजल संसाधनों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए कुछ प्रयास हुए थे, लेकिन राष्ट्रीय और राज्यों के स्तर पर कृषि क्षेत्र में भूजल उपयोग को विनियमित (रेगुलेट) करने के लिए उचित वैधानिक समर्थन के अभाव में, इसका प्रशासन एक चुनौती बना हुआ है।
इस संदर्भ में, 2019-20 में, भारत सरकार ने भूजल स्तर में गिरावट रोकने और प्रभावी सामुदायिक भागीदारी के जरिए भूजल संसाधन के प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए, विशेष रूप से उन इकाइयों (आम तौर पर ब्लॉक) में, जो अत्यधिक दोहन (भूजल विकास का चरण 100 प्रतिशत से अधिक) की शिकार हैं, केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में अटल भूजल योजना (एबीवाई) को शुरू किया। इस योजना का परिव्यय 6,000 करोड़ रुपये (840 मिलियन अमेरिकी डॉलर) है (DoWR,RD&GR 2023a), जिसमें से 50 प्रतिशत राशि विश्व बैंक से ऋण के रुप में मिलती है और शेष राशि भारत सरकार से इसे लागू करने वाले राज्यों को अनुदान सहायता के रूप में दी जाती है। 2020-21 से 2024-25 तक की अवधि के लिए, यह योजना सात राज्यों - गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश - में चयनित जल-संकट ग्रस्त क्षेत्रों में लागू की जा रही है। इस योजना में 1, 2, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 12, 13, 15, 16 और 17 सहित विभिन्न सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने की क्षमता है (चित्र ES1 देखें)।
इस रिपोर्ट में, हमने डेस्क रिव्यू और फील्ड विजिट के माध्यम से योजना का मूल्यांकन पेश किया है। हम इसे लागू करने की स्थिति, सफलता के प्रमुख कारक (ताकत), कार्यान्वयन की चुनौतियां (कमजोरियां), सुधार के अवसर और योजना की स्थिरता को प्रभावित करने वाले बाहरी खतरों की जांच की है। इसके अलावा, राजस्थान के चयनित जिलों में संचालित त्वरित, लेकिन व्यापक फील्ड रिसर्च के आधार पर, हमने अगले चरण में प्रशासन और कार्यान्वयन में सुधार के लिए लागू करने योग्य सुझाव दिए हैं। हमने समुदाय-आधारित भागीदारीपूर्ण भूजल प्रबंधन को सक्षम बनाने के लिए अन्य देशों के लिए सीख (लर्निंग) भी प्रस्तुत किया है। यह अध्ययन जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में अटल भूजजल योजना की राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (एनपीएमयू) के निर्देश पर किया गया था।
चित्र ES1 संभावित सतत विकास लक्ष्य और उद्देश्य जिन्हें अटल भूजल योजना के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।

सोर्सः लेखकों का विश्लेषण
हमने एक उदार पद्धतिगत दृष्टिकोण (eclectic methodological approach) और गुणात्मक (qualitative) व मात्रात्मक (quantitative) उपकरणों का इस्तेमाल करके यह अध्ययन किया है। इसमें दो चरण शामिल थे (चित्र 3)। चरण-1 में जयपुर (जहां राज्य कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (SPMU) का कार्यालय स्थित है) और पड़ोसी जिले (दौसा) का दौरा शामिल है, ताकि जमीनी स्थिति को समझा जा सके। योजना के कार्यान्वयन के बारे में हितधारकों की प्रतिक्रियाओं की जानकारी जुटाने के लिए प्रश्नावली के अलग-अलग सेट बनाने में चरण-1 से मिली जानकारियों (learnings) का उपयोग किया गया। इन प्रश्नावलियों को चरण-II के लिए चुने गए जिलों, यानी अजमेर, हनुमानगढ़, करौली, जैसलमेर, कोटा और चित्तौड़गढ़ में लागू किया गया।
दोनों चरणों के लिए अगस्त और सितंबर 2023 के महीनों के दौरान तीन शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा फील्डवर्क किया गया था। दूसरे चरण में जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों (डीपीएमयू) के 17, जिला कार्यान्वयन सहभागियों (डीआईपी) के 24, और 25 जीपी सदस्यों के साक्षात्कार लिए गए थे। छह जिलों में 17 ग्राम जल और स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) के साथ केंद्रित समूह चर्चा (एफजीडी) आयोजित की गई। इसके अलावा, चयनित जिलों के सात लाइन विभागों के 29 उत्तरदाताओं के साक्षात्कार लिए गए। माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल का इस्तेमाल करके डेटा का विश्लेषण किया गया। संबंधित डिस्बर्समेंट-लिंक्ड इंडिकेटर्स (डीएलआई) से मिलान करने के लिए प्रत्येक हितधारक की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण और वर्गीकरण किया गया। विश्लेषण के डीएलआई सत्यापन के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) की पद्धति के साथ तालमेल बैठाया गया था। केवल चरण II में शामिल जिलों के लिए परिणाम और निष्कर्ष बताए गए हैं।
चित्र ES2 राजस्थान में अटल भूजल योजना के कार्यान्वयन का SWOT विश्लेषण
स्रोत: लेखकों का विश्लेषण
अन्य देशों के लिए सीख
अटल भूजल योजना (ABY) अन्य देशों के लिए समुदाय-आधारित, सहभागी भूजल प्रबंधन को सक्षम बनाने और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने के लिए आवश्यक सीख देती है। उन्हें तालिका ES1 में प्रस्तुत किया गया है।
तालिका ES1 ग्राम पंचायत (GP) स्तर पर भागीदारी के चरण, उनके स्वरूप, परिणाम और सक्षमकर्ता

स्रोत: लेखकों का विश्लेषण
डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।
अटल भूजल योजना भारत सरकार द्वारा 2019 में शुरू की गई एक केंद्रीय योजना है, जिसका उद्देश्य विभिन्न संचालित योजनाओं के बीच सामंजस्य और स्थानीय समुदायों व हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से सतत भूजल प्रबंधन में सुधार लाना है। इसे 2020-21 से 2024-25 तक सात राज्यों - गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के चुनिंदा क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है, जिसका कुल वित्तीय परिव्यय 6,000 करोड़ रुपये है।
भूजल के बारे में अपने सभी निर्णयों में संसाधनों का अन्य संसाधनों और कारकों के साथ अंतर्संबंधों को समझते और स्वीकार करके भूजल के उपयोग को सस्टेनेबल बनाया जा सकता है। इसमें पेयजल, कृषि, पशुपालन, उद्योग, ऊर्जा, बिजली और अन्य इकोसिस्टम सर्विस के लिए संसाधनों की आवश्यकता; इस पर वर्तमान, निकट भविष्य और भविष्य में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव; और लोगों की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक वास्तविकताओं के अंतर्संबंध शामिल हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, हम वर्तमान में संसाधन का इस तरह से उपयोग कर सकते हैं कि वह आगामी पीढ़ियों की जरूरतों के लिए पर्याप्त मात्रा में बचे रहे।
यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटीज इंस्टीट्यूट ऑफ वॉटर, एनवायरनमेंट एंड हेल्थ के अनुसार, सतत विकास के लिए जल महत्वपूर्ण है। भूजल, जो पृथ्वी पर उपलब्ध मीठे पानी के संसाधन का लगभग 99% है, 13 सतत विकास लक्ष्यों के तहत 53 एसडीजी लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक साबित हो सकता है।
भूजल प्रबंधन में समुदायों को जोड़ने के बहुत से तरीके हैं, जो समुदाय के हित और उस क्षेत्र में प्रभावी कानूनी और नीतिगत प्रावधानों पर निर्भर करते हैं। उदाहरण के लिए, समुदाय को स्थानीय स्तर पर भूजल आवंटन तय करने, इसकी गुणवत्ता व मात्रा की निगरानी करने, प्रबंधन योजनाओं और मांग घटाने वाले उपायों को तैयार व लागू करने, संसाधन के उपयोग व प्रशासन के संबंध में अन्य हितधारकों के साथ बातचीत करने, संसाधन की सुरक्षा करने और संसाधनों के आवंटन या उपयोग से जुड़े विवादों को सुलझाने या बातचीत करने में शामिल किया जा सकता है।
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