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Report

रिप्पल्स: इंडियाज सस्टेनेबल वॉटर मैनेजमेंट स्टोरी

एकांशा खंडूजा, उपासना नेगी, कार्तिकेय चतुर्वेदी, सायबा गुप्ता, नितिन बस्सी
March 2023 | Sustainable Water

प्रस्तावित उद्धरण: खंडूजा, एकांशा, उपासना नेगी, कार्तिकेय चतुर्वेदी, सायबा गुप्ता, और नितिन बस्सी. 2023. रिप्पल्स: इंडियाज सस्टेनेबल वॉटर मैनेजमेंट स्टोरी. नई दिल्ली: काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर

अवलोकन

इस पुस्तक में सतत और न्यायसंगत ढंग से जल प्रबंधन करने के भारत सरकार के मौजूदा प्रयासों को शामिल किया गया है। यह पिछले दो दशकों में भारत में जल प्रबंधन के लिए लागू प्रमुख नीतियों, योजनाओं और अभियानों का संक्षिप्त विवरण प्रदान करती है। योजनाओं को सात विषय-वस्तुओं के तहत व्यवस्थित किया गया है, जैसा कि नीचे सूचीबद्ध है। प्रत्येक कार्यक्रम के लिए, यह किताब उनके उद्देश्य, वित्तीय आवंटन, कार्यान्वयन, उपलब्धियां, रोजगार की संभावना, आर्थिक विकास और सतत विकास में योगदान की जानकारी देती है।

प्रमुख बिंदु

  • भारत वॉश (WASH) के तहत चार योजनाओं को लागू कर रहा है - जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण और शहरी दोनों), और अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन।
  • ये योजनाएं प्रति वर्ष जलजनित बीमारियों का खर्च घटाते हुए बचत (savings) में 1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का योगदान कर सकती हैं, बेहतर शौचालयों तक पहुंच के कारण आने वाले जनस्वास्थ्य लाभों से 349 अरब अमेरिकी डॉलर जोड़ सकती हैं, और उपचारित अपशिष्ट जल के पुनर्उपयोग से प्रत्येक वर्ष 76 लाख अमेरिकी डॉलर का बाजार मूल्य पैदा कर सकती हैं।
  • ये कार्यक्रम ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार पैदा करते हैं, और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) 3, 6, और 12 को पाने में सहायक हैं।

  • नदी घाटी-स्तरीय संसाधन आकलन (basin-level resource assessment) और नियोजन को बेहतर बनाने के लिए, भारत राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (National Hydrology Project) को लागू कर रहा है।
  • भारत में जल और सिंचाई क्षेत्र में भू-स्थानिक (geospatial) बाजार 2025 तक 147 मिलियन अमेरिकी डॉलर होने और कम से कम 28,000 लोगों को रोजगार मिलने की अनुमान है।
  • यह परियोजना सतत विकास लक्ष्य 6 और 17 को पाने में सहायक है।

  • इस थीम के तहत, जल शक्ति अभियान (a recurring annual campaign) और वॉटरशेड डेवलपमेंट प्रोग्राम लागू किए जाते हैं।
  • इन कार्यक्रमों में निवेश से मृदा अपरदन में गिरावट, सिंचित क्षेत्र में वृद्धि इत्यादि के रूप में निवेश लागत का दोगुना लाभ मिल सकता है। ये कार्यक्रम कुशल और अकुशल दोनों तरह के श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करते हैं, और सतत विकास लक्ष्य 2, 6, 12 व 15 को हासिल करने योगदान देते हैं। यह मरुस्थलीकरण से निपटने के यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन के भारत के लक्ष्य को पाने में भी योगदान देता है।

  • इस थीम के तहत, भारत नेशनल प्लान फॉर कंजर्वेशन ऑफ एक्वेटिक इकोसिस्टम (National Plan for Conservation of Aquatic Ecosystem) (जलाशय व झील पारिस्थितिकी तंत्र दोनों के प्रबंधन के लिए), नमामि गंगे कार्यक्रम (गंगा व उसकी सहायक नदियों के प्रदूषण में प्रभावी कमी लाने, संरक्षण और कायाकल्प के लिए), और रिवर रिजूवनेशन प्लान (13 प्रमुख नदियों और उनकी 202 सहायक नदियों का कायाकल्प करने के लिए) को लागू कर रहा है।
  • नमामि गंगे के तहत लागू किए जा रहे अर्थ गंगा इकोनॉमिक मॉडल के माध्यम से भारत की जीडीपी का लगभग 3 प्रतिशत हिस्सा आने की परिकल्पना है। इसके अलावा, आर्द्रभूमियों (wetlands) के प्रबंधन से प्रति हेक्टेयर 679 अमेरिकी डॉलर का वार्षिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
  • ये कार्यक्रम पर्यटन, मत्स्य पालन और असंगठित क्षेत्र के कार्यों में रोजगार अवसरों को बढ़ाते हैं, और एसडीजी 1, 2, 6, 13 व 15 को प्राप्त करने में योगदान देते हैं।

  • भारत बांध पुनर्वास एवं सुधार कार्यक्रम (Dam Rehabilitation and Improvement Programme) (तीन चरणों में 959 बांधों का पुनर्वास करने के लिए) और अंतर-नदी घाटी जल स्थानांतर (Inter Basin Water Transfer) (अतिरिक्त जल वाली नदी घाटियों से पानी की कमी वाली नदी घाटियों में पानी स्थानांतरित करने के लिए) लागू कर रहा है।
  • भारत इन कार्यक्रमों के माध्यम से बाढ़ के कारण होने वाले नुकसान पर आने वाली सालाना लागत (लगभग 7.4 अरब अमेरिकी डॉलर) को बचा सकता है, और 34,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन जोड़ सकता है।
  • ये कार्यक्रम कुशल और अकुशल दोनों तरह के श्रमिकों के लिए रोजगार अवसर सृजित करते हैं, और एसडीजी 2, 6 व 13 को प्रोत्साहित करते हैं।

  • इस थीम के तहत, भारत नेशनल वॉटर मिशन (विभिन्न क्षेत्रों में जल उपयोग दक्षता में 20 प्रतिशत तक सुधार लाने के लिए), पर ड्रॉप-मोर क्रॉप (Per-Drop More Crop) योजना (खेतों में सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के प्रोत्साहन के लिए), और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का उपयोग करने वाले किसानों को प्राथमिकता देते हुए मौजूदा बिजली और डीजल सिंचाई पंपों को सोलरलाइज करने के लिए प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) को लागू कर रहा है।
  • ये योजनाएं स्मार्ट जल समाधानों (smart water solutions) के लिए बाजार को बढ़ा सकती हैं, किसानों की आय में 48 प्रतिशत तक की वृद्धि और देश में डीजल खपत में 1.38 मिलियन टन की कमी ला सकती हैं।
  • इन कार्यक्रमों के भीतर भारत में हरित रोजगार (green jobs) को बढ़ावा देने, खास तौर पर विनिर्माण क्षेत्र में, और एसडीजी 1, 2, 6, 7 और 13 को प्राप्त करने में योगदान देने की अपार क्षमता है।

  • भारत तीन आयामों में जलीय चट्टानी परतों या जलभृतों (aquifer) को परिभाषित व चिन्हित करने और जलभृतों की प्रबंधन योजनाएं विकसित करने के लिए नेशनल प्रोजेक्ट ऑन एक्वीफर मैनेजमेंट (NAQUIM) लागू कर रहा है। इसके साथ अटल भू-जल योजना को भी लागू किया जा रहा है, जो एक समुदाय-संचालित भू-जल प्रबंधन योजना (community-driven groundwater management scheme) है।
  • ये योजनाएं आर्थिक विकास के लिए भू-जल की सतत उपलब्धता सुनिश्चित कर सकती हैं और भू-जल दोहन के लिए बिजली की जरूरत को घटाते हुए कृषि क्षेत्र को मिलने वाली बिजली सब्सिडी में कमी ला सकती हैं।
  • ये योजनाएं तकनीकी और शोध क्षेत्रों के साथ-साथ अकुशल श्रम कार्यों के लिए भी रोजगार सृजित कर रही हैं, और एसडीजी 6 और 12 को पाने में योगदान दे रही हैं।
“भारत अपने जल के सतत प्रबंधन के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहा है। भारत के दृष्टिकोण की मूलदृष्टि को समझने के इच्छुक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों के लिए, यह पुस्तक एक सुविधाजनक संदर्भ है।”

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