
स्तावित उद्धरण: सोमन, अभिनव, हरसिमरन कौर, हिमानी जैन, और कार्तिक गणेशन। इंडियाज इलेक्ट्रिक व्हिकल ट्रांजिशन: कैन इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सपोर्ट इंडियाज सस्टेनेबल इकोनॉमिक रिकवरी पोस्ट कोविड-19? नई दिल्ली: काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर।
डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।
यह रिपोर्ट, शक्ति सस्टेनेबल एनर्जी फाउंडेशन द्वारा समर्थित, इलेक्ट्रिक वाहन संक्रमण (transition) का भारत की आर्थिक बहाली (economic recovery) पर प्रभाव का पता लगाती है। यह 2030 में 30 प्रतिशत ईवी बिक्री हिस्सेदारी का घरेलू मूल्यवर्धन, रोजगार, कच्चे तेल के आयात, कर आधारित आय, स्थानीय प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों (जीएचजी) के उत्सर्जन पर पड़ने वाले प्रभाव की पड़ताल करती है। इसके अलावा, इअध्ययन विभिन्न प्रकार के साधनों की हिस्सेदारी (mode-share) वाले परिदृश्यों- (i) उच्च सार्वजनिक परिवहन परिदृश्य, (ii) उच्च निजी वाहन परिदृश्य, और (iii) साझा मोबिलिटी परिदृश्य (shared mobility scenario)- में इन प्रभावों का मापन करता है।
2030 में 30% ईवी ट्रांजिशन से कई लाभों और प्रतिकूलताएं भी सामने आएंगी, जिन्हें दूरदर्शी नियोजन से टाला जा सकता है

स्रोत: लेखकों का विश्लेषण
कोविड-19 महामारी समाप्त होने के बाद आर्थिक सुधार और स्थिर वृद्धि के लिए विभिन्न उपायों में से एक इलेक्ट्रिक वाहनों की दिशा में बदलाव का रास्ता तैयार करना है, जिसमें निवेश और त्वरित बाजार विकास की जबरदस्त क्षमता मौजूद है। 2030 में कुल वाहन बिक्री में 30 प्रतिशत ईवी ट्रांजिशन से अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है और हमने मुख्य रूप से तेल आयात में बदलाव, मूल्य-वृद्धि, रोजगार, सार्वजनिक वित्त पर प्रभाव, ईवी कलपुर्जों के लिए बाजार आकार और स्थानीय वायु प्रदूषकों व ग्रीनहाउस गैसों (जीएचजी) के उत्सर्जन में गिरावट से आने वाले पर्यावरणीय लाभों पर ध्यान केंद्रित किया है।
हमने 2030 में वाहनों की संख्या का सामान्य परिस्थिति (business-as usual) और 30 प्रतिशत ईवी की हिस्सेदारी वाले परिदृश्यों में पूर्वानुमान करके इन विषयों को विस्तार से समझने का प्रयास किया है। इसके अलावा, 2030 में कुल वाहन बिक्री में 30 प्रतिशत ईवी की हिस्सेदारी के साथ मोड-शेयर (mode-share) का उद्योग, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर आने वाले प्रभावों के दायरे का आकलन करने के लिए, हमने तीन अलग-अलग मोबिलिटी प्रतिमानों - (i) उच्च सार्वजनिक परिवहन, (ii) उच्च निजी वाहन और (iii) उच्च साझा मोबिलिटी की जांच की है। हमारे मुख्य निष्कर्षों और सुझाव इस प्रकार हैं:
हमारे आकलनों के अनुसार, हमने आधार वर्ष 2016 और अनुमानित वर्ष 2030 के बीच वाहनों की संख्या (यात्री + माल ढुलाई) में लगभग 2.7 गुना वृद्धि का अनुमान लगाया है। हमने सामान्य परिस्थिति (BAU) परिदृश्य के विपरीत, कुल वाहन बिक्री में 30 प्रतिशत ईवी हिस्सेदारी (इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स और इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स में 35 प्रतिशत; इलेक्ट्रिक बसों में 30 प्रतिशत; इलेक्ट्रिक टैक्सियों में 25 प्रतिशत; और इलेक्ट्रिक कारों में 13 प्रतिशत) के परिणामों को जांचा है।
चित्र ईएस1: यदि 2030 में नई गाड़ियों की बिक्री में ईवी 30 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राप्त कर लेती है, तो इससे कई फायदे सामने आएंगे।

स्रोत: लेखकों का विश्लेषण
एक सामान्य परिस्थिति (बीएयू) के विपरीत 2030 में कुल वाहन बिक्री में ईवी की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी के लाभों को अनदेखा करना मुश्किल है। यात्री सड़क परिवहन क्षेत्र में तेल की मांग घटने से भारत कच्चे तेल के आयात पर 1,07,566 करोड़ रुपए (14.1 अरब अमेरिकी डॉलर) बचाएगा। इसके अलावा, सामान्य परिस्थिति (बीएयू) की तुलना में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) और नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन में 17 प्रतिशत, कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन में 18 प्रतिशत, और ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन में 4 प्रतिशत की गिरावट आने की उम्मीद की जा सकती है। तेल आयात को घटाने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाने के भारत के लक्ष्यों के साथ अनुरूपता लाने के अलावा, ईवी इकोसिस्टम 2030 में बैटरियों, पावरट्रेन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 2,12,456 करोड़ रुपये (27.8 अरब डॉलर) का मार्केट साइज पेश करता है। उचित नीतिगत वातावरण के तहत, ईवी विनिर्माण के लिए वैल्यू-चैन भविष्य के निवेशों के लिए एक आकर्षक अवसर उपलब्ध कराती है, जो अर्थव्यवस्था को अति-आवश्यक प्रोत्साहन दे रही है। हालांकि, किसी भी बड़े तकनीकी परिवर्तन के साथ नुकसान और समझौते (trade-offs) जुड़े होते हैं। चित्र ईएस2 ईवी ट्रांजिशन के कुछ प्रमुख समझौतों को प्रदर्शित करते हैं।
चित्र ईएस2 ईवी ट्रांजिशन में कुछ समझौते शामिल हैं, जिनके प्रभावों को दूरदर्शी नियोजन के माध्यम से टाला जा सकता है।

स्रोत: लेखकों का विश्लेषण
जब ईवी क्षेत्र में विनिर्माण और ऊर्जा उत्पादन गतिविधियों में सृजित प्रत्यक्ष रोजगार की तुलना होती है, तब हम ईवी वाले परिदृश्य में कम नौकरियां पाते हैं, तेल क्षेत्र और आईसीई वाहन विनिर्माण को मिलाकर 19 प्रतिशत नौकरियां घट जाती हैं। नौकरियां सृजित करने के लिए एक ईवी ट्रांजिशन योजना को नई आर्थिक गतिविधियों, जैसे बैटरी रीसाइक्लिंग (urban mining) और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़ी अन्य सेवाओं पर समान रूप से जोर देना चाहिए। आईसीई वाहनों के लिए नीतिगत समर्थन बनाए रखने वाली प्रतिकूल प्रोत्साहनों को सीमित करने और भारत में ईवी उपयोग में तेजी लाने के क्रम में, केंद्र और राज्य सरकारों को पेट्रोलियम खपत से जुड़े राजस्व पर अपनी निर्भरता घटानी चाहिए। जैसा कि चित्र ईएस1 और ईएस2 से स्पष्ट है, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ट्रांजिशन से होने वाले लाभ संभावित नुकसानों से कहीं ज्यादा हैं।
नीतिगत हस्तक्षेप और व्यवहार परिवर्तन यात्री परिवहन के साधनों की हिस्सेदारी (mode-share) में बदलाव ला सकते हैं और यह ऊर्जा खपत, वायु गुणवत्ता, भीड़भाड़ और सड़क सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए हमने विभिन्न मोबिलिटी प्रतिमानों के तहत ईवी विस्तार का अतिरिक्त विश्लेषण किया। हमारे अनुमान बताते हैं कि भविष्य में उच्च सार्वजनिक परिवहन के साथ कुल वाहन बिक्री में ईवी की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी सामान्य परिस्थिति परिदृश्य की तुलना में तेल आयात में 31 प्रतिशत (2,16,043 करोड़ रुपए या 28.3 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर) कमी लाएगी। समान परिदृश्य में, इसके साथ-साथ कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) उत्सर्जन में 36 प्रतिशत, नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) उत्सर्जन में 28 प्रतिशत, पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) उत्सर्जन में 29 प्रतिशत और ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन में 20 प्रतिशत की कमी आएगी। दूसरी ओर, निजी वाहनों के स्वामित्व उच्च होने की स्थिति में यात्री परिवहन के इलेक्ट्रिफिकेशन के बताए गए लाभ उलट जाते हैं, जो सामान्य परिस्थिति परिदृश्य की तुलना में ऊर्जा खपत को 5 प्रतिशत वृद्धि बढ़ा देगा। इसलिए ईवी ट्रांजिशन के लाभों को वास्तविकता बनाने के लिए नीति निर्माताओं को यात्री परिवहन में विभिन्न तरह के साधनों की हिस्सेदारी के विकास को आकार देने पर ध्यान देना चाहिए। अधिकतर यात्राओं (trips) और सवारियों की यात्रा मांगों को सार्वजनिक परिवहन और पैदल चलने व साइकिल चलाने जैसे नॉन-मोटर चालित परिवहन विकल्पों से पूरा किया जाना चाहिए।
विश्व इस समय कोविड-19 महामारी के बुरे प्रभाव से जूझ रहा है, जिसने आर्थिक विकास को भी बाधित किया है। भारत जब महामारी से उभरेगा, तब नीति निर्माताओं की प्राथमिकता आर्थिक विकास को दोबारा मजबूत बनाना और रोजगार सृजन करना होगा। हमारा दृढ़ता से मानना है कि घरेलू ईवी (EV) विनिर्माण के विकास को बढ़ावा देना और सड़क यात्री परिवहन में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए बाजार बनाना, ऐसे आशाजनक हस्तक्षेप हैं जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हैं और स्थिरता सुनिश्चित करते हैं। इसलिए हम नीति निर्माताओं और उद्योग जगत से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए एक ऐसी ट्रांजिशन योजना पर साझेदारी करने का आग्रह करते हैं, जो भुगतान संतुलन में सुधार, नए बाजार और नौकरियों के सृजन के रूप में उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाए और साथ में सरकार के राजस्व, तेल क्षेत्र और आईसीई वाहन निर्माण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को घटाने के लिए पर्याप्त उपाय भी करे।
हमारा आकलन है कि भारत की बढ़ती यात्रा मांग को पूरा करने के लिए 2016 और 2030 के बीच देश में वाहनों की संख्या में 165 प्रतिशत की वृद्धि होगी। ईवी30 परिदृश्य में, यात्री परिवहन की तेल खपत में 12 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है। यह रणनीति व्यापार संतुलन और ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए तेल आयात घटाने के भारत के लक्षित उद्देश्यों का समर्थन करती है। हालांकि, देश में आईसीई वाहनों की हिस्सेदारी घटने के कारण जीवाश्म ईंधन की खपत में गिरावट आने से केंद्र और राज्य सरकारों को लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। इस स्थिति में सरकार की तरफ से पेट्रोलियम कर राजस्व पर निर्भरता को घटाने के लिए उपयुक्त रणनीतियां बनाने की आवश्यकता है, जिन्हें इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के समानांतर लागू किया जाना चाहिए।
महत्वपूर्ण है कि ईवी विस्तार बाजार विकास के बड़े अवसर लाता है। 2030 में कुल वाहन बिक्री में ईवी की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ उच्च मूल्यवर्धिक घटकों का बाजार लगभग 2.1 लाख करोड़ रुपए (27.8 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंचने की उम्मीद है, जिनमें बैटरियां, इलेक्ट्रिक पावरट्रेन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। ये गतिविधियां ईवी आपूर्ति श्रृंखला के उन हिस्सों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो एक अनुकूल नीतिगत माहौल के भीतर नए निवेश के लिए महत्वपूर्ण प्रोत्साहन सृजित कर सकती हैं। नए विनिर्माण गतिविधियों और बिजली खपत बढ़ने से 2030 में लगभग 1.2 लाख नौकरियां सृजित होने की उम्मीद है। कुल वाहन बिक्री में ईवी की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी का लक्ष्य बिल्कुल भी महत्वाकांक्षी नहीं है, क्योंकि इसे सिर्फ इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री से ही पूरा किया जा सकता है, जो 2030 तक आरंभिक लागत और कुल स्वामित्व लागत- दोनों ही मामलों में लागत प्रतिस्पर्धा हासिल कर लेंगे। इसलिए, हम दृढ़ता से सुझाव देते हैं कि भारत के लिए ईवी रोडमैप को ईवी विस्तार की बहुत उच्च हिस्सेदारी को लक्ष्य बनाया जाना चाहिए।
सिर्फ नीति और वित्तीय प्रोत्साहन (सब्सिडी) के माध्यम से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्रोत्साहित करना काफी नहीं है। सस्टेनेबल मोबिलिटी के लिए सड़कों से भीड़भाड़ को घटाना और सड़क सुरक्षा को सुधारना भी नीति-निर्माताओं की योजनाओं का हिस्सा होना चाहिए। हमने ट्रैफिक की भीड़भाड़ (traffic congestion) को घटाने और सड़क सुरक्षा को बढ़ाने के लिए नागरिकों के आवागमन के साधनों की पसंद को आकार देकर उसे सार्वजनिक और साझा परिवहन (shared mobility) की दिशा में मोड़ने का सुझाव दिया है। वाहनों की हिस्सेदारी का लक्ष्य पाने के लिए, केंद्र और राज्य सरकारों को विभिन्न रणनीतियों के माध्यम से मोटर वाहनों का उपयोग घटाने पर ध्यान देना चाहिए, जिसमें सार्वजनिक और साझा परिवहन विकल्पों का प्रोत्साहन शामिल हो। बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने के अलावा, अन्य उपायों की तुलना में सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने वाले परिदृश्य (सामान्य परिस्थिति परिदृश्य की तुलना में) में तेल आयात में 31 प्रतिशत तक कमी लाने की क्षमता है। अगर नागरिक सार्वजनिक परिवहन और शेयर्ड मोबिलिटी को पसंद करते हैं, और साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ते हैं, तो इससे पीएम, सीओ और नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन स्तर में बड़ी गिराटव आ सकती है, जिससे भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सार्वजनिक और शेयर्ड मोबिलिटी के साधनों के समर्थन वाली ईवी निर्देशित परिवहन व्यवस्था का एक अन्य सकारात्मक पहलू भीड़भाड़ में कमी है, जिसकी आर्थिक लागत का इस अध्ययन में आकलन नहीं हुआ है।
रोजगार पर ईवी ट्रांजिशन के असर का आकलन करने वाले भविष्य के अध्ययन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और प्वाइंट चार्जिंग व बैटरी स्वैपिंग में अंतर करने के साथ-साथ इनकी स्थापना और संचालन से जुड़ी नौकरियों के बारे में विचार कर सकते हैं। इस अध्ययन में वाहन विनिर्माण से अलग ईवी इकोसिस्टम में मौजूद बैटरी रीसाइक्लिंग और अन्य सेवाएं से संबंधित अप्रत्यक्ष रोजगार और रोजगार सृजन का आकलन नहीं किया गया है,जिनकी भविष्य के अध्ययनों में पड़ताल की जा सकती है।
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