
प्रस्तावित उद्धरण: घोष व अन्य 2024। ए फीजिबिलिटी स्टडी ऑफ इलेक्ट्रिक बायसिकल्स: केस ऑफ मनिक्कल ग्राम पंचायत, केरल। नई दिल्ली: काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर; कॉनवर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड एंड एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर, इंडिया।
डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।
माइक्रोमोबिलिटी प्रौद्योगिकियां, जिसमें मुख्य रूप से ई-साइकिल और कम रफ्तार वाली ई-मोपेड शामिल हैं, संपूर्ण वैश्विक दक्षिण (Global South) में फैल रही हैं। निम्न संचालन लागत, उपयोग और चार्जिंग/स्वैपिंग में आसानी, इन तकनीकों की स्वीकार्यता को बढ़ाने वाले प्राथमिक कारक हैं। आंतरिक दहन इंजनों (internal combustion engines) और मोटर युक्त दोपहिया वाहनों की तुलना में ई-साइकिल और ई-मोपेड एक ऊर्जा-कुशल विकल्प हैं। सीमित सार्वजनिक परिवहन सेवा और महंगे साझा परिवहन माइक्रोमोबिलिटी प्रोद्योगिकियों को ग्रामीण क्षेत्रों में एक आकर्षक विकल्प बनाते हैं।
इस अध्ययन में आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं के बीच ई-साइकिल के प्रदर्शन के बाद किए गए एक विस्तृत सर्वेक्षण दिया गया है। इस अध्ययन का उद्देश्य आवागमन के वर्तमान उपायों के विकल्प के रूप में ई-साइकिल की क्षमता का आकलन करना है।
चिन्हित किए गए लाभार्थियों में आशा कार्यकर्ता और हरित कर्मा सेना के सदस्यों ने ई-साइकिल लेने में सबसे ज्यादा रुचि दिखाई। यह रुचि कुछ लोगों के पारंपरिक साइकिल चलाने के सीमित अनुभव के बावजूद आई है।
70–75 प्रतिशत लाभार्थियों का मानना था कि ई-साइकिल थकान घटाएगी और काम की दक्षता बढ़ेगी, जिससे वे अधिक मजदूरी मिल सकेगी। आर्थिक व्यवहार्यता का अनुमान लगाने के लिए, कुल स्वामित्व लागत (टीसीओ) की गणना बताती है कि ई-साइकिल और कम गति वाली ई-मोपेड, आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाहनों और इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की तुलना में लगभग 56-70 प्रतिशत सस्ती पड़ती हैं। इस अध्ययन में शामिल लक्षित समूहों के उत्तरदाता सालाना लगभग 23,000 रुपये से लेकर 40,000 रुपये तक अपनी आवागमन पर खर्च करते हैं। ई-साइकिल और कम रफ्तार वाली ई-मोपेड जैसे वैकल्पिक साधनों को अपनाने पर ईंधन की कम लागत के कारण यह खर्च घटकर प्रति वर्ष लगभग 6,500 रुपये तक हो सकता है। लक्ष्य समूहों की ई-साइकिल और कम गति वाली ई-मोपेड खरीदने की अनुमानित मासिक भुगतान क्षमता 2-3 साल की अवधि में लगभग 500 रुपये है। हालांकि, ईंधन की कम लागत के कारण होने वाली बचत लगभग 900 रुपये से 2,300 रुपये प्रति माह होगी, जो उनकी भुगतान क्षमता को 500 रुपये की जगह पर बढ़ाकर 1000 - 1500 रुपये कर सकता है।
विभिन्न क्षेत्रों, खासकर ग्रामीण इलाकों में, सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता सीमित है, जिससे आवागमन के लिए मोटरयुक्त निजी वाहनों का इस्तेमाल बढ़ा रहा है। जैसे-जैसे आर्थिक स्थिति बेहतर होती है, निजी वाहनों को खरीदने की आकांक्षा बढ़ती जाती है, जो ईंधन की खपत और उत्सर्जन बढ़ाती है। इसलिए, स्वच्छ विकल्पों के माध्यम से आर्थिक विकास को उत्सर्जन से अलग करना बहुत जरूरी हो गया है।
मार्च और जून 2023 के बीच, कॉन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) की टीम ने छत्तीसगढ़ के रायपुर और आसपास के जिलों, उत्तर प्रदेश के लखनऊ, बिहार के नालंदा और केरल के तिरुवनंतपुरम जिलों में फील्ड विजिट की थी। इसका उद्देश्य छोटी दूरी (5-10 किमी) तय करने वाले लोगों द्वारा इलेक्ट्रिक साइकिल जैसी तकनीकों को अपनाने की संभावना का आकलन करना था। टीम ने आवागमन के अधिक सुविधाजनक उपायों का लाभ उठा सकने में सक्षम लक्षित लाभार्थियोंलक्षित लाभार्थियों की पहचान करने के लिए वर्तमान यात्रा अवधियों, ऑन-डिमांड यात्राओं की आवृत्ति और परिवहन खर्च का अध्ययन किया था। शुरुआती फील्ड विजिट ने संकेत दिया कि ई-साइकिलें आवागमन का व्यवहार्य तरीका हैं, जो लोगों की अपनी निजी गाड़ी रखने की चाहत को पूरा करती हैं, साथ में शून्य उत्सर्जन भी सुनिश्चित करती हैं।
शुरुआती चर्चाओं में महिला सरकारी कर्मचारियों, खास तौर पर आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को कामकाजी यात्राओं के लिए ई-साइकिल के संभावित उपयोगकर्ता के रूप में देखा गया। बाद में, सीईएसएल और काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) ने केरल के एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर (ईएमसी) के साथ मिलकर एक व्यापक सर्वेक्षण और प्रदर्शन किया, ताकि मनिक्कल ग्राम पंचायत, जो केरल की नेट-जीरो पंचायतों में से एक है, में चिन्हित लाभार्थियों के मौजूदा यात्रा प्रवृत्ति के संभावित विकल्प के रूप में ई-साइकिल की व्यवहार्यता का आकलन किया जा सके।
जुलाई 2023 में पंचायत कार्यालय में ई-साइकिल के तीन अलग-अलग मॉडल उपलब्ध कराए गए। मनिक्कल ग्राम पंचायत में आयोजित ई-साइकिल प्रदर्शन (demonstration) को काफी उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली, और चिन्हित लक्षित समूहों ने परीक्षण के तौर पर इन्हें चलाने के बाद विस्तार से अपने अनुभव साझा किए। अधिकांश लाभार्थियों (70-75 प्रतिशत) का मानना था कि ई-साइकिल से थकान को घटाएगी, और कार्यकुशलता सुधारेगी, जिससे अधिक मजदूरी मिल सकेगी।
चित्र 1 विभिन्न तकनीकों के कुल स्वामित्व लागत (टीसीओ) की तुलना

स्रोत: लेखकों का विश्लेषण
उनकी आकांक्षाओं, पुनर्भुगतान करने की क्षमता और विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नीचे दिए गए ई-साइकिल के मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया गया है:
वित्तीय प्रोत्साहन और एकत्रीकरण (aggregation) व्यवहार्यता को बढ़ा सकते हैं: बड़े पैमाने पर ई-साइकिल का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय और प्रादेशिक सरकारों की तरफ से दो चरणों में लक्षित प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं:
चित्र 2 ई-साइकिल के प्रदर्शन के बाद लाभार्थियों द्वारा मांगी गई अतिरिक्त सुविधाएं

स्रोत: लेखकों के विश्लेषण
गांवों और छोटे कस्बों में सामाजिक आकांक्षाओं को पूरा करते हुए ई-साइकिलें व्यक्तिगत आवागमन की चुनौतियों को दूर करने के लिए एक आदर्श समाधान के रूप में उभरी हैं। यह ऊर्जा दक्षता और शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों को बढ़ावा देने के साथ भारत के नेट-जीरो 2070 लक्ष्य में भी योगदान देता है। इसके अलावा, ई-माइक्रोमोबिलिटी प्रौद्योगिकियां समय बचाती हैं, आवागमन की चुनौतियों का समाधान करती है, आजीविका की संभावनाएं बढ़ाती हैं, और महिलाओं को अधिक आत्मनिर्भर बनाते हुए एक समावेशी परिवर्तन प्रोत्साहित करती हैं।
ई-साइकिलें ऐसी साइकिलें होती हैं, जिनमें एक सहायक पॉवर यूनिट लगी होती है, जो पैडल चलाने में मदद करती है या पूरी तरह से थ्रॉटल-कंट्रोलिंग प्रोपेलिंग फोर्स (propelling) उपलब्ध कराती है। हमारा विश्लेषण संकेत देता है कि ई-साइकिल और कम गति वाली ई-मोपेड अपने आईसीई और ईवी समकक्ष वाहनों की तुलना में लगभग 56-70 प्रतिशत किफायती हैं। इसलिए, ये भारतीय बाजार में अन्य मोटर चालित दोपहिया वाहनों की तुलना में एक किफायती समाधान हो सकती हैं।
ई-साइकिल 5-10 किलोमीटर की दूरी के लिए एक फायदेमंद और मोटर चालित आंतरिक दहन इंजन (ICE) दोपहिया वाहनों का एक अच्छा विकल्प हो सकती हैं। इस प्रकार से, ई-साइकिल दोपहिया वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को घटा सकती हैं, जो वर्तमान में भारतीय सड़कों पर कुल मोटर चालित वाहनों का सबसे बड़ा हिस्सा है।
अपने सर्वेक्षण से हम पाते हैं कि अधिकांश लाभार्थी (70-75 प्रतिशत) मानते हैं कि इ-साइकिल थकान को घटाएगी और कार्य कुशलता में सुधार लाएगी, जिससे उन्हें अधिक आय मिल सकेगी। हमारा विश्लेषण यह भी संकेत देता है कि ई-साइकिल को अपनाने से सालाना लगभग 70-80 प्रतिशत की बचत होती है। यह लाभार्थियों की खर्च करने योग्य आय को बढ़ा सकती है, जो बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवा की सुविधा और बेहतर पारिवारिक व सामाजिक सहायता बढ़ाता है।
भारत के कई ग्रामीण इलाकों में, कम और बिखरी हुई मांग के कारण सार्वजनिक परिवहन और साझा किए जाने वाले वाहन अव्यवहार्य (unviable) हैं, जिससे लोगों को आवागमन के लिए पेट्रोल से चलने वाले निजी दोपहिया वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है। कुल स्वामित्व लागत (TCO) बताती है कि ई-साइकिल और कम गति वाले ई-मोपेड पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों की तुलना में लगभग 70% सस्ते हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से फायदेमंद हैं।
हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी संस्थानों में ई-साइकिलों के लिए संभावना है। केवल केरल में ही आंगनवाड़ी, आशा और एसएचजी कार्यकर्ताओं के बीच लगभग 77,000 ई-साइकिलों की मांग है।
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