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एक्सेलरेटिंग द इंप्लीमेंटेशन ऑफ इंडियाज नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन
असेसमेंट ऑफ स्टैंडर्ड्स टू इनेबल द इकोसिस्टम
04 August, 2023 | Industrial Sustainability
प्रतीक श्रीपति, दीपक यादव, अदिति बहुगुणा, और हेमंत मल्ल्या

प्रस्तावित उद्धरण: श्रीपति, प्रतीक, दीपक यादव, अदिति बहुगुणा और हेमंत माल्या। 2023। एक्सेलरेटिंग द इंप्लीमेंटेशन ऑफ इंडियाज नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन:असेसमेंट ऑफ स्टैंडर्ड्स टू इनेबल द इकोसिस्टम। नई दिल्ली: काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायरमेंट एंड वॉटर

डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।

अवलोकन

यह अध्ययन भारत में ग्रीन हाइड्रोजन (Green hydrogen) से जुड़े मौजूदा मानकों की व्यापक जानकारी उपलब्ध कराता है। यह रिपोर्ट ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) और यूनाइटेड किंगडम (यूके) जैसे देशों में ग्रीन हाइड्रोजन की संपूर्ण वैल्यू चेन (value chain) के विभिन्न घटकों के मानकों से भारतीय मानकों की तुलना करती है। यह तुलना भारत में हाइड्रोजन वैल्यू चेन में मौजूद मानकों में अंतर की पहचान करती है और लागू करने योग्य विकल्पों का सुझाव देती है।

भारत ने हाल ही में शुरू हुए नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के माध्यम से 2030 तक 5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादित करने का लक्ष्य रखा है। हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के विकास में मदद करने के लिए, सरकारें, अनुसंधान संस्थाएं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं हाइड्रोजन वैल्यू चेन के नियमों, मानकों और प्रक्रियाओं को सुसंगत बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।


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“एक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए संचालन और सुरक्षा के मानक पूर्वापेक्षाएं हैं। अंतर्राष्ट्रीय मानकों को तेज़ी से विकसित करना या अपनाना भारत में ग्रीन हाइड्रोजन की सफलता की कुंजी होगी।”

कार्यकारी सारांश

पूरे विश्व में ग्रीन हाइड्रोजन की स्थापना अभी शुरुआती चरण में है। अगस्त 2022 तक, यूरोपीय संघ (ईयू) सहित 38 देश या तो ग्रीन हाइड्रोजन नीतियां बना रहे थे या उनका अनुमोदन कर चुके थे। जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के बढ़ते दबाव और कई देशों में अक्षय ऊर्जा तक पहुंच की कमी को देखते हुए ग्रीन हाइड्रोजन, इससे मिले ईंधन और संबंधित प्रौद्योगिकियों के व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। नियमों (कोड) और मानकों की कमी को किसी भी नई तकनीक का व्यापक उपयोग लाने में लगातार एक बड़ी बाधा माना जाता है। हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के विकास  में मदद करने के लिए, सरकारें, अनुसंधान संस्थाएं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं हाइड्रोजन वैल्यू चेन के नियमों, मानकों और प्रक्रियाओं को सुसंगत बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

भारत ने हाल ही में शुरू किए गए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के माध्यम से 2030 तक 5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। भारत में हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं को तेजी से विस्तार देने के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) बनाने की जरूरत होगी, और हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस एक महत्वपूर्ण घटक होगा। इस संबंध में, हाइड्रोजन मानकों के विकास और सामंजस्य लाने के उपाय हरित हाइड्रोजन बाजार में व्यवसायों के प्रवेश को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। चूंकि भारत ने आने वाले दशकों में हरित हाइड्रोजन के लिए एक वैश्विक केंद्र बनने का लक्ष्य रखा है, इसलिए सभी वैल्यू चेन के मानकों का वैश्विक निर्यात बाजारों के साथ सामंजस्य होना अति-महत्वपूर्ण है।

ए. भारत में हाइड्रोजन मानकों का अंतर आकलन

यह अध्ययन भारत में ग्रीन हाइड्रोजन (Green hydrogen) से जुड़े मौजूदा मानकों की व्यापक जानकारी उपलब्ध कराता है। यह रिपोर्ट ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) और यूनाइटेड किंगडम (यूके) जैसे देशों में ग्रीन हाइड्रोजन की संपूर्ण वैल्यू चेन (value chain) के विभिन्न घटकों के मानकों से भारतीय मानकों की तुलना करती है। यह तुलना भारत में हाइड्रोजन वैल्यू चेन में मौजूद मानकों में अंतर की पहचान करती है और लागू करने योग्य विकल्पों का सुझाव देती है। यह तुलना उन मानकों की पहचान करने में सक्षम बनाती है जो दुनिया भर में लोकप्रिय हैं, ताकि उचित परिश्रम के बाद उन्हें भारत में अपनाया जा सके। यह तुलना पूरे विश्व में लोकप्रिय उन मानकों को चिन्हित करने में मदद करती है, जिन्हें उचित रूप से परखने के बाद भारत में लागू किया जा सकता है।

बी. मुख्य सिफारिशें

हाइड्रोजन वैल्यू चेन से संबंधित मानकों में लुप्त कड़ियों (missing links)और अपनाने योग्य विकल्पों को ES चित्र 1 में योजनाबद्ध रूप से संक्षेप में दिया गया है। मानकों में कमियों को वैल्यू चेन के विभिन्न चरणों - यानी उत्पादन, भंडारण, परिवहन, उपयोग और वितरण - के अनुसार वर्गीकृत किया गया है। प्रमुख सुझाव नीचे दिए गए हैं।

हाइड्रोजन उत्पादन

  • इलेक्ट्रोलाइटिक हाइड्रोजन (Electrolytic Hydrogen) उत्पादन के लिए आईएस 16509:2020 मानक में सॉलिड ऑक्साइड इलेक्ट्रोलाइजर (SOEC) शामिल नहीं है, जिनकी आने वाले दशकों में महत्वपूर्ण भूमिका होने की उम्मीद है। यूएल एलएलसी  2264ए (UL LLC 2264A)  मानक के लिए रूपरेखा में परिभाषित आवश्यकताओं को शामिल करने के लिए इसे अपडेट किया जाना चाहिए।
  • हाइड्रोकार्बन सुधार के माध्यम से हाइड्रोजन उत्पादन का मानक आईएस 16512 (पार्ट 1) :2016 में प्राकृतिक गैस या बायोमास पायरोलिसिस जैसे वैकल्पिक साधनों के जरिए उत्पादन को शामिल नहीं करता है। भारत को इन प्रौद्योगिकियों के लिए सक्रियता के साथ मानक बनाने चाहिए, क्योंकि वे ग्रे से ग्रीन हाइड्रोजन की दिशा में संक्रमण (transition) के बीच पुल का काम कर सकते हैं।

हाइड्रोजन भंडारण

  • गैसीय हाइड्रोजन भंडारण के लिए आईएस 7285: पार्ट 1:2018 मानक केवल 400 लीटर तक के सिलेंडर आकार के लिए मानक तय करता है। भारत बड़े आकार के सिलेंडर को शामिल करने के लिए मानक को बढ़ाने पर विचार कर सकता है, क्योंकि निकट भविष्य में हाइड्रोजन की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
  • वर्तमान में भारत के तरल हाइड्रोजन के थोक भंडारण के लिए विशेष रूप से परिभाषित मानक नहीं हैं। भारत को सीजीए पी-12, एनएफपीए 55 और ईआईजीए डॉक 06/19 जैसे मानकों को विकसित करना और अपनाना चाहिए।

हाइड्रोजन की ढुलाई

  • वर्तमान में, भारत के पास हाइड्रोजन पाइपलाइन के लिए समर्पित मानक नहीं हैं। इसे हाइड्रोजन को बड़ी मात्रा में सुरक्षित परिवहन की अनुमति देने के लिए ASME B31.12-2019 या CGA G-5.6 जैसे मानकों को अपनाने पर विचार करना चाहिए। स्वीकार किए जाने वाले मानकों को हाइड्रोजन परिवहन के लिए स्टील पाइप और हाइड्रोजन परिवहन के लिए प्राकृतिक गैस के संशोधित बुनियादी ढांचे जैसे अन्य विकल्पों को शामिल करना चाहिए।
  • भारत के पास धातु हाइड्राइड भंडारण और हाइड्रोजन परिवहन के लिए भी मानक नहीं हैं। यह विधिवत जांच के बाद निर्धारित ISO 16111:2018  मानक को अपना सकता है।
  • वर्तमान में भारत के पास हाइड्रोजन के समुद्री परिवहन के लिए मानक नहीं हैं। भारत विधिवत जांच के बाद IGC कोड/MSC.420 को अपना सकता है।

हाइड्रोजन उपयोग

  • भारत को ISO 19882:2018 जैसे मानकों को अपनाना चाहिए या थर्मली एक्टिवेटेड प्रेशर रिलीफ  वाल्वों (thermally activated pressure relief valves) के लिए अपने स्वयं के मानक विकसित करने चाहिए, जो हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों का अभिन्न अंग है।
  • भारत में फ्यूल-सेल मॉड्यूल (IEC 62282-3-100:2019 - स्टेशनरी फ्यूल सेल्स; IEC 62282-5-100:2018 - पोर्टेबल फ्यूल सेल्स; और IEC 62282-6-100:2010 - माइक्रो फ्यूल सेल्स), फ्यूल सेल आधारित विमान (SAE AIR 6464), और फ्यूल-सेल-आधारित रेलवे इंजन (IEC 63341 (भाग 1-3)) के लिए मानकों का अभाव है। चूंकि फ्यूल सेल हाइड्रोजन का उपयोग करते हुए ऊर्जा रूपांतरण के प्राथमिक विकल्पों में एक है, इसलिए यह जरूरी है कि ऐसे मानकों को कम से कम समय में अपनाया या विकसित किया जाए।
  • वर्तमान में हाइड्रोजन-ईंधन वाले आंतरिक दहन इंजन (ICE) को नियंत्रित करने के लिए कोई मानक नहीं हैं। भारत को इन्हें विकसित करने का नेतृत्व करना चाहिए।
  • प्रक्रिया ताप अनुप्रयोगों (process heat applications) के लिए हाइड्रोजन के सुरक्षित उपयोग के लिए उपकरणों के परिचालन मापदंडों या डिजाइन विनिर्देशों को परिभाषित करने के मानक नहीं हैं। उद्योगों में हरित ईंधन के रूप में हाइड्रोजन के उपयोग में तेजी लाने के लिए, भारत को इन मानकों को सक्रियता के साथ विकसित करना चाहिए।

हाइड्रोजन वितरण

  • वर्तमान में, भारत में हाइड्रोजन ईंधन भरने वाले स्टेशनों के लिए कोई मानक नहीं है। गैसीय हाइड्रोजन वितरण के लिए ISO 19880-1:2020 या CSA/ANSI HGV 4.9:20 मानक और तरल हाइड्रोजन वितरण के लिए ISO 13984-1999 मानक को अपनाया जा सकता है। अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए हाइड्रोजन वितरण से जुड़े मानक घरेलू आवश्यकताओं और जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप होने चाहिए।

ES तालिका 1 भारत में हाइड्रोजन सुरक्षा मानकों का ब्यौरा देती है, जो वैल्यू चेन के विभिन्न घटकों को शामिल करती है और मौजूदा मानकों के विकल्प सुझाती है; यह उन मामलों में भी मानकों का सुझाव देती है, जहां कोई मानक नहीं हैं। इसके अलावा, विस्तृत टिप्पणी ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, यूके और यूएस जैसे देशों में मानकों की स्थिति की तुलना भी करती है।

चित्र ES1 भारत में हाइड्रोजन वैल्यू चेन की गुम कड़ियां


स्रोत: लेखकों का संकलन

नोट: टेक्स्ट का रंग दर्शाता है कि क्या भारतीय सुरक्षा मानक मौजूद हैं। नीला रंग दर्शाता है कि स्वदेशी मानक विकसित किए गए हैं, जबकि नारंगी रंग दर्शाता है कि स्वदेशी मानक उपलब्ध नहीं हैं और अपनाये योग्य संभावित विकल्पों का संकेत करता है।

तालिका ES1 भारत में हाइड्रोजन मानकों के अंतर-मूल्यांकन का सारांश


स्रोत: लेखकों का संकलन

डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

  • ग्रीन हाइड्रोजन क्या है?

    ग्रीन हाइड्रोजन ऐसी हाइड्रोजन है, जिसे पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के लिए अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल करके बनाया जाता है। भविष्य के इस ईंधन को विकेंद्रीकृत तरीके से ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने की क्षमता विशेष रूप से उपयोगी बनाती है।

  • भारत का नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन क्या है?

    नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन का एक वैश्विक केंद्र बनाना है, साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन और इसके विभिन्न किस्मों के उपयोग और निर्यात की मांग पैदा करना है। यह भारत की जलवायु महत्वाकांक्षाओं में योगदान करेगा और देश को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनने में सहायक होगा। मिशन से अर्थव्यवस्था का प्रमुखता से डीकार्बोनाइजेशन होगा और जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता घटेगी।

  • क्या भारत के पास हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण और परिवहन के लिए मानक हैं?

    भारत के पास पहले से ही प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (पीईएम), अल्कलाइन इलेक्ट्रोलाइजर और एनियन इलेक्ट्रोलाइट मेम्ब्रेन इलेक्ट्रोलाइजर (एईएम) का उपयोग करके हाइड्रोजन को उत्पादित करने के लिए मानक मौजूद हैं, लेकिन सॉलिड ऑक्साइड इलेक्ट्रोलाइजर सेल (एसओईसी) के लिए मानक नहीं हैं। भारत के पास हाइड्रोकार्बन रिफॉर्मिंग के माध्यम से हाइड्रोजन उत्पादन के लिए भी मानक हैं। हालांकि, भारत के पास प्राकृतिक गैस या बायोमास पायरोलिसिस जैसे वैकल्पिक साधनों के माध्यम से हाइड्रोजन उत्पादन के लिए मानक नहीं हैं। भारत के पास हाइड्रोजन के गैसीय भंडारण के लिए भी मानक हैं, लेकिन तरल हाइड्रोजन के थोक भंडारण के लिए मानकों को विकसित करने की जरूरत है। भारत के पास फ्यूल-सेल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ऑनबोर्ड हाइड्रोजन भंडारण के लिए भी मानक हैं। हालांकि, भारत के पास गैसीय और तरल हाइड्रोजन के भंडारण और ढुलाई के लिए मानक हैं, लेकिन इसकी पाइपलाइनों के माध्यम से ढुलाई के लिए मानक नहीं हैं।

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