
प्रस्तावित उद्धरण: श्रीपति, प्रतीक, दीपक यादव, अदिति बहुगुणा और हेमंत माल्या। 2023। एक्सेलरेटिंग द इंप्लीमेंटेशन ऑफ इंडियाज नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन:असेसमेंट ऑफ स्टैंडर्ड्स टू इनेबल द इकोसिस्टम। नई दिल्ली: काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायरमेंट एंड वॉटर
डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।
यह अध्ययन भारत में ग्रीन हाइड्रोजन (Green hydrogen) से जुड़े मौजूदा मानकों की व्यापक जानकारी उपलब्ध कराता है। यह रिपोर्ट ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) और यूनाइटेड किंगडम (यूके) जैसे देशों में ग्रीन हाइड्रोजन की संपूर्ण वैल्यू चेन (value chain) के विभिन्न घटकों के मानकों से भारतीय मानकों की तुलना करती है। यह तुलना भारत में हाइड्रोजन वैल्यू चेन में मौजूद मानकों में अंतर की पहचान करती है और लागू करने योग्य विकल्पों का सुझाव देती है।
भारत ने हाल ही में शुरू हुए नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के माध्यम से 2030 तक 5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादित करने का लक्ष्य रखा है। हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के विकास में मदद करने के लिए, सरकारें, अनुसंधान संस्थाएं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं हाइड्रोजन वैल्यू चेन के नियमों, मानकों और प्रक्रियाओं को सुसंगत बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
पूरे विश्व में ग्रीन हाइड्रोजन की स्थापना अभी शुरुआती चरण में है। अगस्त 2022 तक, यूरोपीय संघ (ईयू) सहित 38 देश या तो ग्रीन हाइड्रोजन नीतियां बना रहे थे या उनका अनुमोदन कर चुके थे। जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के बढ़ते दबाव और कई देशों में अक्षय ऊर्जा तक पहुंच की कमी को देखते हुए ग्रीन हाइड्रोजन, इससे मिले ईंधन और संबंधित प्रौद्योगिकियों के व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। नियमों (कोड) और मानकों की कमी को किसी भी नई तकनीक का व्यापक उपयोग लाने में लगातार एक बड़ी बाधा माना जाता है। हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के विकास में मदद करने के लिए, सरकारें, अनुसंधान संस्थाएं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं हाइड्रोजन वैल्यू चेन के नियमों, मानकों और प्रक्रियाओं को सुसंगत बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
भारत ने हाल ही में शुरू किए गए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के माध्यम से 2030 तक 5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। भारत में हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं को तेजी से विस्तार देने के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) बनाने की जरूरत होगी, और हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस एक महत्वपूर्ण घटक होगा। इस संबंध में, हाइड्रोजन मानकों के विकास और सामंजस्य लाने के उपाय हरित हाइड्रोजन बाजार में व्यवसायों के प्रवेश को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। चूंकि भारत ने आने वाले दशकों में हरित हाइड्रोजन के लिए एक वैश्विक केंद्र बनने का लक्ष्य रखा है, इसलिए सभी वैल्यू चेन के मानकों का वैश्विक निर्यात बाजारों के साथ सामंजस्य होना अति-महत्वपूर्ण है।
ए. भारत में हाइड्रोजन मानकों का अंतर आकलन
यह अध्ययन भारत में ग्रीन हाइड्रोजन (Green hydrogen) से जुड़े मौजूदा मानकों की व्यापक जानकारी उपलब्ध कराता है। यह रिपोर्ट ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) और यूनाइटेड किंगडम (यूके) जैसे देशों में ग्रीन हाइड्रोजन की संपूर्ण वैल्यू चेन (value chain) के विभिन्न घटकों के मानकों से भारतीय मानकों की तुलना करती है। यह तुलना भारत में हाइड्रोजन वैल्यू चेन में मौजूद मानकों में अंतर की पहचान करती है और लागू करने योग्य विकल्पों का सुझाव देती है। यह तुलना उन मानकों की पहचान करने में सक्षम बनाती है जो दुनिया भर में लोकप्रिय हैं, ताकि उचित परिश्रम के बाद उन्हें भारत में अपनाया जा सके। यह तुलना पूरे विश्व में लोकप्रिय उन मानकों को चिन्हित करने में मदद करती है, जिन्हें उचित रूप से परखने के बाद भारत में लागू किया जा सकता है।
बी. मुख्य सिफारिशें
हाइड्रोजन वैल्यू चेन से संबंधित मानकों में लुप्त कड़ियों (missing links)और अपनाने योग्य विकल्पों को ES चित्र 1 में योजनाबद्ध रूप से संक्षेप में दिया गया है। मानकों में कमियों को वैल्यू चेन के विभिन्न चरणों - यानी उत्पादन, भंडारण, परिवहन, उपयोग और वितरण - के अनुसार वर्गीकृत किया गया है। प्रमुख सुझाव नीचे दिए गए हैं।
हाइड्रोजन उत्पादन
हाइड्रोजन भंडारण
हाइड्रोजन की ढुलाई
हाइड्रोजन उपयोग
हाइड्रोजन वितरण
ES तालिका 1 भारत में हाइड्रोजन सुरक्षा मानकों का ब्यौरा देती है, जो वैल्यू चेन के विभिन्न घटकों को शामिल करती है और मौजूदा मानकों के विकल्प सुझाती है; यह उन मामलों में भी मानकों का सुझाव देती है, जहां कोई मानक नहीं हैं। इसके अलावा, विस्तृत टिप्पणी ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, यूके और यूएस जैसे देशों में मानकों की स्थिति की तुलना भी करती है।
चित्र ES1 भारत में हाइड्रोजन वैल्यू चेन की गुम कड़ियां
स्रोत: लेखकों का संकलन
नोट: टेक्स्ट का रंग दर्शाता है कि क्या भारतीय सुरक्षा मानक मौजूद हैं। नीला रंग दर्शाता है कि स्वदेशी मानक विकसित किए गए हैं, जबकि नारंगी रंग दर्शाता है कि स्वदेशी मानक उपलब्ध नहीं हैं और अपनाये योग्य संभावित विकल्पों का संकेत करता है।
तालिका ES1 भारत में हाइड्रोजन मानकों के अंतर-मूल्यांकन का सारांश
स्रोत: लेखकों का संकलन
डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।
ग्रीन हाइड्रोजन ऐसी हाइड्रोजन है, जिसे पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के लिए अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल करके बनाया जाता है। भविष्य के इस ईंधन को विकेंद्रीकृत तरीके से ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने की क्षमता विशेष रूप से उपयोगी बनाती है।
नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन का एक वैश्विक केंद्र बनाना है, साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन और इसके विभिन्न किस्मों के उपयोग और निर्यात की मांग पैदा करना है। यह भारत की जलवायु महत्वाकांक्षाओं में योगदान करेगा और देश को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनने में सहायक होगा। मिशन से अर्थव्यवस्था का प्रमुखता से डीकार्बोनाइजेशन होगा और जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता घटेगी।
भारत के पास पहले से ही प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (पीईएम), अल्कलाइन इलेक्ट्रोलाइजर और एनियन इलेक्ट्रोलाइट मेम्ब्रेन इलेक्ट्रोलाइजर (एईएम) का उपयोग करके हाइड्रोजन को उत्पादित करने के लिए मानक मौजूद हैं, लेकिन सॉलिड ऑक्साइड इलेक्ट्रोलाइजर सेल (एसओईसी) के लिए मानक नहीं हैं। भारत के पास हाइड्रोकार्बन रिफॉर्मिंग के माध्यम से हाइड्रोजन उत्पादन के लिए भी मानक हैं। हालांकि, भारत के पास प्राकृतिक गैस या बायोमास पायरोलिसिस जैसे वैकल्पिक साधनों के माध्यम से हाइड्रोजन उत्पादन के लिए मानक नहीं हैं। भारत के पास हाइड्रोजन के गैसीय भंडारण के लिए भी मानक हैं, लेकिन तरल हाइड्रोजन के थोक भंडारण के लिए मानकों को विकसित करने की जरूरत है। भारत के पास फ्यूल-सेल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ऑनबोर्ड हाइड्रोजन भंडारण के लिए भी मानक हैं। हालांकि, भारत के पास गैसीय और तरल हाइड्रोजन के भंडारण और ढुलाई के लिए मानक हैं, लेकिन इसकी पाइपलाइनों के माध्यम से ढुलाई के लिए मानक नहीं हैं।
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