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ISSUE BRIEF
हाउ कैन इंडिया इंडिजेनाइज लिथियम-आयन बैटरी मैन्युफैक्चरिंग?
फॉर्मूलेटिंग स्ट्रैटेजीज एक्रॉस द वैल्यू चेन
21 February, 2023 |
ध्रुव वॉरियर, आकांक्षा त्यागी, और ऋषभ जैन

प्रस्तावित उद्धरण: वॉरियर, ध्रुव, आकांक्षा त्यागी, और ऋषभ जैन। 2023। हाउ कैन इंडिया इंडिजेनाइज लिथियम-आयन बैटरी मैन्युफैक्चरिंग? फॉर्मूलेटिंग स्ट्रैटेजीज एक्रॉस द वैल्यू चेन। नई दिल्ली: काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर।

डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।

अवलोकन

कार्बन उत्सर्जन को घटाने के भारत के लक्ष्यों को पाने के लिए देश में लिथियम-आयन बैटरी सेल का निर्माण बढ़ाना और स्थिरता लाना अत्यंत आवश्यक है। यह इश्यू ब्रीफ लिथियम-आयन बैटरी सेल की निर्माण प्रक्रिया का विश्लेषण करता है, सामग्री और वित्तीय आवश्यकताओं का आकलन करता है, और संभावित स्वदेशीकरण रणनीति के लिए एक ब्लूप्रिंट उपलब्ध कराता है। भारत के बिजली और परिवहन क्षेत्र में 2021-22 और 2029-30 के बीच तेजी से बढ़ने वाली बैटरी की अनुमानित मांग का एक प्रमुख हिस्सा घरेलू बैटरी निर्माण के जरिए पूरा किया जा सकता है। इस अध्ययन में पाया गया है कि ऐसे बड़े विनिर्माण को सक्षम बनाने के लिए भारी-भरकम पूंजी जुटाने और उद्योग को आपूर्ति करने के लिए बैटरी घटकों व इलेक्ट्रोड सामग्री को भी प्राप्त करने की आवश्यकता होगी।

लिथियम-आयन बैटरी आपूर्ति श्रृंखलाओं (supply chains) में स्वदेशी अपस्ट्रीम और मिडस्ट्रीम क्षमता के विकास को अतिरिक्त मूल्य जुटाने के अवसर के रूप में चिन्हित किया गया है। इस अध्ययन का निष्कर्ष है कि भारत को इस नए उद्योग को मजबूत बनाने के लिए नवाचार, इकोसिस्टम निर्माण और कैथोड खनिज आपूर्तियों को सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होगी।

मुख्य निष्कर्ष

  • 2021-22 से 2029-30 के बीच यूटिलिटी स्केल स्टोरेज (utility-scale storage) और इलेक्ट्रिक वाहनों से संयुक्त रूप से 903 गीगावाट ऑवर्स (GWh) एनर्जी स्टोरेज (energy storage) की आवश्यकता आने का अनुमान है।
  • बैटरी सेल विनिर्माण का स्वदेशीकरण सेल के अंतिम मूल्य का 11-25 प्रतिशत योगदान करता है, जबकि 22-61 प्रतिशत तक योगदान अपस्ट्रीम कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और मटीरियल प्रोसेसिंग से आता है।
  • प्रोडक्शन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत 50 GWh क्षमता वाले लिथियम-आयन सेल और बैटरी विनिर्माण प्लांट स्थापित करने के लिए 4.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की आवश्यकता है।
  • 2022-2030 के बीच 969–1452 किलो टन अलग-अलग एक्टिव कैथोड सामग्री पाउडर, ग्रेफाइट और इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत होगी।
  • बैटरी सेल विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ाने और वैश्विक बैटरी विनिर्माण इकोसिस्टम में रुझान तय करने में सक्षम बनने के लिए ये इश्यू ब्रीफ भारत के लिए तीन सूत्री रणनीति का सुझाव देता है। पहला, प्रक्रियाओं में बदलाव करके उत्पादन की लागत कम करें। दूसरा, एनर्जी स्टोरेज प्रणालियों के विनिर्माण और स्थापना के लिए नीति में बदलाव करें। तीसरा, अनुसंधान, विकास और प्रदर्शन पर रणनीतिक रूप से ध्यान दें

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रिसर्च एनालिस्ट
“भारतीय उद्योग विस्तृत ग्लोबल बैटरी वैल्यू चेन में अग्रणी देश बन सकता है, बशर्ते सामग्रियों और वित्त तक पर्याप्त पहुंच रहे और नवाचारों पर लगातार ध्यान दिया जाए।”

कार्यकारी सारांश

बिजली और परिवहन क्षेत्रों के कार्बन उत्सर्जन को घटाने में एनर्जी स्टोरेज तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आने की उम्मीद है। 2016 में भारत के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य) में इन क्षेत्रों का हिस्सा 49 प्रतिशत था (एमओईएफसीसी 2021)। इस दशक में इस क्षेत्र पर एनर्जी स्टोरेज के लिए उपलब्ध विभिन्न तकनीकों में लिथियम-ऑयन बैटरियों के हावी रहने का अनुमान है (आईईए 2021)। आपूर्ति श्रृंखला में लगभग न के बराबर बुनियादी ढांचा और स्थापना के सीमित अनुभव के साथ, भारत के लिए लिथियम-आयन बैटरियों की आपूर्ति श्रृंखला पर ज्यादा नियंत्रण पाना बहुत जरूरी है। भारत को अपने डिकॉर्बोनाइजेशन लक्ष्यों को पाने के लिए, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की जटिलता को देखते हुए, बैटरी सेल विनिर्माण को बढ़ाना और स्थिरता लाना अति-आवश्यक है। इस इश्यू ब्रीफ में, हम लिथियम-आयन बैटरी सेल की विनिर्माण प्रक्रिया को विस्तार से समझेंगे, सामग्री और वित्त की जरूरतों का अनुमान लगाएंगे और एक संभावित स्वदेशीकरण रणनीति की रूपरेखा पेश करेंगे।

मुख्य निष्कर्ष

  • 2021-22 से 2029-30 तक,यूटिलिटी स्केल स्टोरेज और इलेक्ट्रिक वाहनों से कुल एनर्जी स्टोरेज की आवश्यकता 903 गीगावाट ऑवर्स रहने की उम्मीद है। देश के परिवहन और बिजली क्षेत्रों की विकास-यात्रा के आधार पर कुल एनर्जी स्टोरेज की मांग में काफी भिन्नता आएगी। इस अध्ययन के लिए, हम हाल ही में विद्युत मंत्रालय द्वारा घोषित एनर्जी स्टोरेज उत्तरदायित्व के आधार पर यूटिलिटी-स्केल स्टोरेज की मांग का आकलन किया है (विद्युत मंत्रालय 2022)। अधिसूचना में सिफारिश की गई है कि 2030 तक कुल खपत का 4 प्रतिशत भंडारित अक्षय ऊर्जा होनी चाहिए। हमारा विश्लेषण संकेत देता है कि 2030 तक यह लगभग 327 GWh की एनर्जी स्टोरेज क्षमता में बदल जाएगा (सीईए 2022)।
  • शेष मांग (576 GWh) इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) से आने का अनुमान 2020 में काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के एक अध्ययन के आधार पर लगाया गया है। इस अध्ययन में ईवी30@30 परिदृश्य के तहत 2030 में भारत में ईवी की संख्या का अनुमान लगाया गया है (सोमन व अन्य 2020)।
  • अपस्ट्रीम घटक विनिर्माण और सामग्री प्रसंस्करण के 22-61% योगदान के साथ, सेल की अंतिम कीमत में बैटरी सेल विनिर्माण का स्वदेशीकरण 11-25% का योगदान करता है।
  • चित्र ईएस1 लिथियम निकिल मैंगनीज कोबाल्ट (Li-NMC) बैटरियों के लिए मूल्य श्रृंखला में विभिन्न चरणों और संभावित मूल्यवर्धन को दर्शाता है। अभी भारतीय कंपनियों का ध्यान बैटरी सेल निर्माण पर है, लेकिन भारत में अधिक से अधिक सेल निर्माण संयंत्र चालू होने के साथ संभावना है कि अगला ध्यान अपस्ट्रीम प्रक्रिया पर होगा। इन उद्योगों में ग्रेफाइट एनोड उत्पादन और कैथोड एक्टिव सामग्री उत्पादन के साथ इलेक्ट्रोलाइट, सैपेरेटर और करंट कलेक्टर का निर्माण शामिल है।
  • इन सब में एक्टिव कैथोड सामग्री उत्पादन सबसे महत्वपूर्ण है। बैटरी कैथोड में इस्तेमाल होने वाले खनिजों के बाजार मूल्य बहुत अस्थिर होते हैं। जैसे कच्चे माल के दाम में बदलाव आता है, उसी तरह बैटरियों की वास्तविक लागत भी उनकी कैमिस्ट्री के आधार पर बदलती रहेगी। इसके अलावा, खनिजों तक विश्वसनीय पहुंच सुनिश्चित करना एक नई चुनौती है। भारत में अधिकांश लिथियम-आयन बैटरी खनिजों के लिए प्राकृतिक भंडार सीमित होने के कारण मूल्य श्रृंखला का 12-60 प्रतिशत हिस्सा आयात पर निर्भर है।
  • प्रोडक्शन लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत 50 GWh क्षमता वाले लिथियम-आयन सेल और बैटरी निर्माण संयंत्रों को स्थापित करने के लिए 4.5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की जरूरत है।
  • हमारे विश्लेषण में, हमने नई बैटरी विनिर्माण सुविधाओं की न्यूनतम क्षमता 5GWh माना है। प्रत्येक 5 GWh सुविधा के लिए, जमीन खरीद, फैक्ट्री फ्लोर स्पेस, वेयरहाउसिंग और कनेक्टिंग यूटिलिटीज समेत कुल लागत 32.5–45 करोड़ अमेरिकी डॉलर (2437–3375 करोड़ रुपए) के बीच हो सकती है। इसके अलावा, ये फैक्ट्रियां ऊर्जा की अधिकता (energy intensive) वाली भी होंगी, जिनमें 5 GWh उत्पादन सुविधा की इकाई प्रति वर्ष लगभग 250 GWh (250 MU) ऊर्जा की खपत करेगी।
  • 2022-2030 के बीच 969-1452 किलो टन अलग-अलग एक्टिव कैथोड सामग्री पाउडर, ग्रेफाइट और इलेक्ट्रोलाइट की जरूरत होगी।
  • भारत की एक्टिव इलेक्ट्रोड (कैथोड और एनोड) और इलेक्ट्रोलाइट की आवश्यकता का अनुमान लगाने के लिए, हम अलग-अलग मात्रा में स्वदेशीकरण और प्रौद्योगिकी के मिश्रण के साथ तीन परिदृश्यों का उपयोग करते हैं, ताकि बैटरियों के जरिए 903 GWh की एनर्जी स्टोरेज मांग को पूरा किया जा सके (टेबल ईएस1)।

चित्र ईएस 1 लिथियम निकल मैंगनीज कोबाल्ट (Li-NMC-622) कमेस्ट्री वैल्यू चेन

 lithium ion battery vlaue chain india

स्रोत: लेखक का विश्लेषण, आर्गोन नेशनल लेबोरेटरी 2020, शंघाई मेटल्स मार्केट (एसएमएम एन.डी.), सेलएस्ट 2019

नोट: मूल्य श्रृंखला के प्रत्येक चरण पर तैयार एलआईबी सेल में जोड़ा गया मूल्य जून 2022 और जून 2021 के लिए है (कोष्ठक में)। सीएएम प्रोसेसिंग वैल्यू ऐड में अग्रगामी सीएएम प्रोसेसिंग के दौरान जोड़ा गया मूल्य भी शामिल है। सीएएम के अलावा अन्य घटकों के लिए, निर्माता के लिए उपभोज्य (consumable) का मूल्य उनके वैल्यू शेयर के रूप में दिया गया है। अन्य सेल घटकों का संदर्भ ये है: सैपेरेटर [VA - 3%(6%)], एल्यूमीनियम करंट कलेक्टर [VA - <1%(<1%)], कॉपर करंट कलेक्टर [VA - 2%(4%)], इलेक्ट्रोलाइट [VA - 2%(4%)]; विश्लेषण में सेल केसिंग वैल्यू पर विचार नहीं किया गया है। पूर्णांकन (rounding) के कारण मूल्यों का योग 100% तक नहीं हो सकता है।सीएएम: कैथोड एक्टिव मैटेरियल।

टेबल ईएस 1 एक्टिव इलेक्ट्रोड सामग्री और इलेक्ट्रोलाइट मांग अनुमान के लिए विकसित किया गया परिदृश्य

जैसा कि चित्र ES1 में दिखाया गया है, परिदृश्य 1 में मांग सर्वाधिक है (1452 kt); इसकी विशेषता उच्च स्वदेशीकरण (कुल मांग का 60 प्रतिशत) है और बाजार में लिथियम-आयन आधारित रसायन का वर्चस्व है।

इस बीच, परिदृश्य 3 - समान स्तर के स्वदेशीकरण लेकिन रेडॉक्स प्रवाह और सॉलिड स्टेट बैटरियों जैसी अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ - एक्टिव सामग्रियों और इलेक्ट्रोलाइट्स (1157 किलो टन) की कम मांग दर्शाता है।

चित्र ईएस 2 भारत के भंडारण लक्ष्यों के लिए विभिन्न परिदृश्यों (2022-2030) में संचयी एक्टिव सामग्री की आवश्यकता (किलो टन, kt)

lithium ion battery manufacturing india

Li-NMC — लिथियम निकल मैंगनीज कोबाल्ट; LFP— लिथियम फेरो फॉस्फेट; NCA—निकल कोबाल्ट एल्युमीनियम
स्रोत: लेखक का विश्लेषण

सुझाव

बैटरी निर्माण में निवेशकों की रुचि सुनिश्चित करने के लिए कई तरह के हस्तक्षेपों की आवश्यकता है। मोटे तौर पर, इन हस्तक्षेपों को तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • प्रक्रियागत बदलावों के माध्यम से विनिर्माण लागत घटाएं: वैश्विक स्तर पर बैटरी विनिर्माण के काम में बहुत तेजी आने की उम्मीद है। इसमें आगे बने रहने के लिए भारतीय निर्माताओं को लगातार नवाचार करने के साथ अपनी विनिर्माण प्रक्रिया को अपडेट करते रहना होगा। उन्हें प्रक्रिया नवाचारों (process innovation) को आगे बढ़ाना चाहिए, रसायन उद्योग की विशेषज्ञता का लाभ उठाना चाहिए, बिजली की खपत घटानी चाहिए, और बैटरी विनिर्माण व बैटरी पुरानी होने के दौरान दोषों का पता लगाने के लिए आंकड़ों के विश्लेषण (data analytics) का उपयोग करना चाहिए। विनिर्माताओं को आंतरिक क्षमता विकसित करने के साथ अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान व विकास (आर एंड डी) केंद्रों के साथ साझेदारियां करने की जरूरत है। सरकारी एजेंसियां की बैटरी खरीदने की योजना, यह अनिवार्य करके कि उनकी खरीद का एक निश्चित हिस्सा नए और अगली पीढ़ी की तकनीकों का होना चाहिए, इस तरह के नवाचारों को बढ़ावा दे सकती हैं।
  • एनर्जी स्टोरेज प्रणालियों के विनिर्माण और स्थापना में नीतिगत परिवर्तन होना चाहिए: देश में विनिर्माण बुनियादी ढांचा स्थापित करने के लिए एनर्जी स्टोरेज पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करना महत्वपूर्ण है। सरकार प्रगतिशील कदम उठाते हुए ऐसा कर सकती है, जैसे सेल के पुर्जों पर सीमा शुल्क और टैरिफ कम करना और निम्न-कार्बन बाजारों को लक्षित करने में उद्योग की सहायता करना। भारत को साझा/सार्वजनिक परिवहनों को प्रोत्साहित करने के लिए 10 साल का लक्ष्य तय करना चाहिए, और साथ में विनिर्माताओं को आवश्यक वित्तीय और बुनियादी ढांचा की सहायता देनी चाहिए। इसके अलावा, बैटरी रीसाइक्लिंग पर भी ध्यान होना चाहिए, जो नए खनिजों की जरूरत घटाएगा। साथ में, सरकार को महत्वपूर्ण खनिजों की रणनीतिक खरीद पर भी ध्यान देना चाहिए।
  • अनुसंधान, विकास और प्रदर्शन पर भी ध्यान दें: भारत को भविष्य में बैटरी विनिर्माण क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए, हम लक्ष्य, समयसीमा और अंतिम उपयोग अनुप्रयोगों पर ध्यान केंद्रित करते हुए ऊर्जा भंडारण नवाचार रोडमैप का प्रस्ताव करते हैं।संस्थानिक रूपरेखा और समर्पित बजट ऐसा कर सकते हैं। इसके अलावा, लैब प्रोटोटाइप को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए आवश्यक सहायता देनी चाहिए।

इस क्षेत्र में रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि बैटरी निर्माण इकोसिस्टम में भारत रुझान निर्धारित (trend-setter) करने वाला है, न कि अनुसरणकर्ता। ऐसी केंद्रित रणनीति के अभाव में, सरकार को कृत्रिम सहायता उपायों के माध्यम समय-समय पर हस्तक्षेप करने आवश्यकता होगी।

निष्कर्ष

वैश्विक कार्बन उत्सर्जन को घटाने की प्रक्रिया में एनर्जी स्टोरेज प्रणालियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली हैं, जिससे इनकी मांग में तेजी से बढ़ोतरी होगी। रुझान बताते हैं कि निकट भविष्य में लिथियम-आयन तकनीक पर आधारित बैटरियों की बाजार हिस्सेदारी सबसे अधिक होगी। भारत को घरेलू विनिर्माण के माध्यम से न केवल मांग को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए, बल्कि एक निर्यात महाशक्ति बनने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके लिए आवश्यक होगा कि सरकार मूल्य श्रृंखला के अलग-अलग पहलुओं - खरीद, विनिर्माण, स्थापना और रीसाइक्लिंग के बारे में रणनीतिक रूप से सोचे। अभी इन सभी पहलुओं पर प्रगति सीमित है और इसके लिए विभिन्न हितधारकों - सरकार, उद्योग, अनुसंधान और शिक्षा-जगत से, को एकजुट होकर काम करने की जरूरत होगी। अनुकूल कीमतों पर खनिजों की उपलब्धता वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए एक अति-आवश्यक पक्ष होगा। भारत की विदेश नीति निश्चित रूप से नए रुझानों के अनुरूप होनी चाहिए और प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों में रणनीतिक प्रयास का लक्ष्य रखना चाहिए।

दीर्घावधि रोडमैप तैयार करना, सरकार के लिए तत्काल उठाया जाने वाला सबसे जरूरी कदम है। यह मूल्य श्रृंखला में सभी हितधारकों को देश के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ अनुरूपता (align) लाने में मदद करेगा। अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), प्रक्रिया सुधार और रीसाइक्लिंग पर विशेष ध्यान देने से अन्य देशों से सेल घटकों के आयात की जरूरत कम हो सकती है। कार्यबल की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए, शैक्षणिक संस्थानों को तत्काल पाठ्यक्रम और पाठन सामग्री बनाने का काम शुरू कर देना चाहिए। विभिन्न हस्तक्षेपों के माध्यम से, भारत लिथियम-आयन बैटरी विनिर्माण की पूरी प्रक्रिया के एक बड़े हिस्सा का स्वदेशीकरण कर सकता है।

डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।

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