
प्रस्तावित उद्धरण: वॉरियर, ध्रुव, आकांक्षा त्यागी, और ऋषभ जैन। 2023। हाउ कैन इंडिया इंडिजेनाइज लिथियम-आयन बैटरी मैन्युफैक्चरिंग? फॉर्मूलेटिंग स्ट्रैटेजीज एक्रॉस द वैल्यू चेन। नई दिल्ली: काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर।
डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।
कार्बन उत्सर्जन को घटाने के भारत के लक्ष्यों को पाने के लिए देश में लिथियम-आयन बैटरी सेल का निर्माण बढ़ाना और स्थिरता लाना अत्यंत आवश्यक है। यह इश्यू ब्रीफ लिथियम-आयन बैटरी सेल की निर्माण प्रक्रिया का विश्लेषण करता है, सामग्री और वित्तीय आवश्यकताओं का आकलन करता है, और संभावित स्वदेशीकरण रणनीति के लिए एक ब्लूप्रिंट उपलब्ध कराता है। भारत के बिजली और परिवहन क्षेत्र में 2021-22 और 2029-30 के बीच तेजी से बढ़ने वाली बैटरी की अनुमानित मांग का एक प्रमुख हिस्सा घरेलू बैटरी निर्माण के जरिए पूरा किया जा सकता है। इस अध्ययन में पाया गया है कि ऐसे बड़े विनिर्माण को सक्षम बनाने के लिए भारी-भरकम पूंजी जुटाने और उद्योग को आपूर्ति करने के लिए बैटरी घटकों व इलेक्ट्रोड सामग्री को भी प्राप्त करने की आवश्यकता होगी।
लिथियम-आयन बैटरी आपूर्ति श्रृंखलाओं (supply chains) में स्वदेशी अपस्ट्रीम और मिडस्ट्रीम क्षमता के विकास को अतिरिक्त मूल्य जुटाने के अवसर के रूप में चिन्हित किया गया है। इस अध्ययन का निष्कर्ष है कि भारत को इस नए उद्योग को मजबूत बनाने के लिए नवाचार, इकोसिस्टम निर्माण और कैथोड खनिज आपूर्तियों को सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होगी।
बिजली और परिवहन क्षेत्रों के कार्बन उत्सर्जन को घटाने में एनर्जी स्टोरेज तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आने की उम्मीद है। 2016 में भारत के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य) में इन क्षेत्रों का हिस्सा 49 प्रतिशत था (एमओईएफसीसी 2021)। इस दशक में इस क्षेत्र पर एनर्जी स्टोरेज के लिए उपलब्ध विभिन्न तकनीकों में लिथियम-ऑयन बैटरियों के हावी रहने का अनुमान है (आईईए 2021)। आपूर्ति श्रृंखला में लगभग न के बराबर बुनियादी ढांचा और स्थापना के सीमित अनुभव के साथ, भारत के लिए लिथियम-आयन बैटरियों की आपूर्ति श्रृंखला पर ज्यादा नियंत्रण पाना बहुत जरूरी है। भारत को अपने डिकॉर्बोनाइजेशन लक्ष्यों को पाने के लिए, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की जटिलता को देखते हुए, बैटरी सेल विनिर्माण को बढ़ाना और स्थिरता लाना अति-आवश्यक है। इस इश्यू ब्रीफ में, हम लिथियम-आयन बैटरी सेल की विनिर्माण प्रक्रिया को विस्तार से समझेंगे, सामग्री और वित्त की जरूरतों का अनुमान लगाएंगे और एक संभावित स्वदेशीकरण रणनीति की रूपरेखा पेश करेंगे।
चित्र ईएस 1 लिथियम निकल मैंगनीज कोबाल्ट (Li-NMC-622) कमेस्ट्री वैल्यू चेन

स्रोत: लेखक का विश्लेषण, आर्गोन नेशनल लेबोरेटरी 2020, शंघाई मेटल्स मार्केट (एसएमएम एन.डी.), सेलएस्ट 2019
नोट: मूल्य श्रृंखला के प्रत्येक चरण पर तैयार एलआईबी सेल में जोड़ा गया मूल्य जून 2022 और जून 2021 के लिए है (कोष्ठक में)। सीएएम प्रोसेसिंग वैल्यू ऐड में अग्रगामी सीएएम प्रोसेसिंग के दौरान जोड़ा गया मूल्य भी शामिल है। सीएएम के अलावा अन्य घटकों के लिए, निर्माता के लिए उपभोज्य (consumable) का मूल्य उनके वैल्यू शेयर के रूप में दिया गया है। अन्य सेल घटकों का संदर्भ ये है: सैपेरेटर [VA - 3%(6%)], एल्यूमीनियम करंट कलेक्टर [VA - <1%(<1%)], कॉपर करंट कलेक्टर [VA - 2%(4%)], इलेक्ट्रोलाइट [VA - 2%(4%)]; विश्लेषण में सेल केसिंग वैल्यू पर विचार नहीं किया गया है। पूर्णांकन (rounding) के कारण मूल्यों का योग 100% तक नहीं हो सकता है।सीएएम: कैथोड एक्टिव मैटेरियल।
टेबल ईएस 1 एक्टिव इलेक्ट्रोड सामग्री और इलेक्ट्रोलाइट मांग अनुमान के लिए विकसित किया गया परिदृश्य

जैसा कि चित्र ES1 में दिखाया गया है, परिदृश्य 1 में मांग सर्वाधिक है (1452 kt); इसकी विशेषता उच्च स्वदेशीकरण (कुल मांग का 60 प्रतिशत) है और बाजार में लिथियम-आयन आधारित रसायन का वर्चस्व है।
इस बीच, परिदृश्य 3 - समान स्तर के स्वदेशीकरण लेकिन रेडॉक्स प्रवाह और सॉलिड स्टेट बैटरियों जैसी अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ - एक्टिव सामग्रियों और इलेक्ट्रोलाइट्स (1157 किलो टन) की कम मांग दर्शाता है।
चित्र ईएस 2 भारत के भंडारण लक्ष्यों के लिए विभिन्न परिदृश्यों (2022-2030) में संचयी एक्टिव सामग्री की आवश्यकता (किलो टन, kt)

Li-NMC — लिथियम निकल मैंगनीज कोबाल्ट; LFP— लिथियम फेरो फॉस्फेट; NCA—निकल कोबाल्ट एल्युमीनियम
स्रोत: लेखक का विश्लेषण
बैटरी निर्माण में निवेशकों की रुचि सुनिश्चित करने के लिए कई तरह के हस्तक्षेपों की आवश्यकता है। मोटे तौर पर, इन हस्तक्षेपों को तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
इस क्षेत्र में रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि बैटरी निर्माण इकोसिस्टम में भारत रुझान निर्धारित (trend-setter) करने वाला है, न कि अनुसरणकर्ता। ऐसी केंद्रित रणनीति के अभाव में, सरकार को कृत्रिम सहायता उपायों के माध्यम समय-समय पर हस्तक्षेप करने आवश्यकता होगी।
वैश्विक कार्बन उत्सर्जन को घटाने की प्रक्रिया में एनर्जी स्टोरेज प्रणालियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली हैं, जिससे इनकी मांग में तेजी से बढ़ोतरी होगी। रुझान बताते हैं कि निकट भविष्य में लिथियम-आयन तकनीक पर आधारित बैटरियों की बाजार हिस्सेदारी सबसे अधिक होगी। भारत को घरेलू विनिर्माण के माध्यम से न केवल मांग को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए, बल्कि एक निर्यात महाशक्ति बनने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके लिए आवश्यक होगा कि सरकार मूल्य श्रृंखला के अलग-अलग पहलुओं - खरीद, विनिर्माण, स्थापना और रीसाइक्लिंग के बारे में रणनीतिक रूप से सोचे। अभी इन सभी पहलुओं पर प्रगति सीमित है और इसके लिए विभिन्न हितधारकों - सरकार, उद्योग, अनुसंधान और शिक्षा-जगत से, को एकजुट होकर काम करने की जरूरत होगी। अनुकूल कीमतों पर खनिजों की उपलब्धता वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए एक अति-आवश्यक पक्ष होगा। भारत की विदेश नीति निश्चित रूप से नए रुझानों के अनुरूप होनी चाहिए और प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों में रणनीतिक प्रयास का लक्ष्य रखना चाहिए।
दीर्घावधि रोडमैप तैयार करना, सरकार के लिए तत्काल उठाया जाने वाला सबसे जरूरी कदम है। यह मूल्य श्रृंखला में सभी हितधारकों को देश के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ अनुरूपता (align) लाने में मदद करेगा। अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), प्रक्रिया सुधार और रीसाइक्लिंग पर विशेष ध्यान देने से अन्य देशों से सेल घटकों के आयात की जरूरत कम हो सकती है। कार्यबल की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए, शैक्षणिक संस्थानों को तत्काल पाठ्यक्रम और पाठन सामग्री बनाने का काम शुरू कर देना चाहिए। विभिन्न हस्तक्षेपों के माध्यम से, भारत लिथियम-आयन बैटरी विनिर्माण की पूरी प्रक्रिया के एक बड़े हिस्सा का स्वदेशीकरण कर सकता है।
डिस्क्लेमर: यह मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद है। हमने इसके अनुवाद में पूरी सतर्कता बरती है। यदि इसमें कोई भ्रम होता है या भूलवश कोई त्रुटि सामने आती है तो इसका अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।